2026 का निवेशकों के लिए सबसे खराब साल, 2.5 महीने में 48 लाख करोड़ रुपये डूबे

 नई दिल्‍ली

 शेयर बाजार निवेशकों के लिए कोरोना महामारी के दौर से भी ज्यादा भयानक साल 2026 गुजरा है. इस साल अभी महज ढाई महीने ही बीते हैं, लेकिन जितना नुकसान इतने कम समय में उठाया है, उतना पिछले 15 साल में किसी भी समय नहीं उठाया. भारतीय शेयर बाजार के लिए साल 2026 की शुरुआत तो ठीक रही थी, लेकिन उसके बाद से लगातार दबाव और बिकवाली का ही समय रहा है. आलम यह रहा कि ढाई महीने से भी कम समय में निवेशकों ने 533 अरब डॉलर (48.50 लाख करोड़ रुपये) बाजार में गंवा दिए.

आंकड़ों में झांकें तो पता चलता है कि साल 2011 के बाद से अब भारतीय निवेशकों को सबसे ज्‍यादा नुकसान हुआ है. इस साल अभी तक बीएसई पर लिस्‍टेड कंपनयिों का मार्केट कैप 533 अरब डॉलर नीचे आ चुका है, जो 2011 में करीब 625 अरब डॉलर गिरा था. खास बात यह है कि भारतीय शेयर बाजार को हुआ नुकसान मैक्सिको, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, नॉर्वे, फिनलैंड, वियतनाम और पोलैंड के बाजारों को हुए कुल नुकसान से भी ज्‍यादा है. इतना ही नहीं, भारतीय शेयर बाजार के नुकसान का आंकड़ा चिली, ऑस्ट्रिया, फिलीपींस, कतर और कुवैत को हुए नुकसान से भी दोगुना रहा है.

मार्केट कैप एक साल में सबसे कम
भारतीय शेयर बाजार में लिस्‍टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप अभी करीब 4.77 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है, जो अप्रैल 2025 के बाद से सबसे निचला स्‍तर है. यह साल 2026 की शुरुआत में करीब 5.3 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया था. लिहाजा इसमें सीधे 10 फीसदी की गिरावट दिख रही है. यह गिरावट दिखाती है कि भारतीय शेयर बाजार में साल 2026 की शुरुआत से अब तक किस कदर बिकवाली हावी रही है. जनवरी से ही यहां लगातार उतार-चढ़ाव दिख रहा है.

विदेशी निवेशकों की बेरुखी कायम
भारतीय शेयर बाजार पर सबसे ज्‍यादा असर डालने वाले विदेशी निवेशकों की बेरुखी 2025 के बाद इस साल भी कायम है. साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने लगातार अपने पैसे निकाले हैं. इसके अलावा कंपनियों की कमाई और ट्रेड वॉर की वजह से भी बाजार पर खासा असर दिखा है. टैरिफ से लेकर मिसाइल तक के युद्ध ने पूरी दुनिया के बाजार को हिला दिया है, जिसका भारतीय बाजार पर कुछ ज्‍यादा ही असर दिखा.

ईरान युद्ध ने आग में डाला घी.
अभी अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के टैरिफ वॉर से दुनिया संभली भी नहीं थी कि ईरान के साथ-साथ खाड़ी देशों में शुरू हुए युद्ध ने ग्‍लोबल मार्केट को हिलाकर रख दिया. कच्‍चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा पहुंचा है, जिससे भारत में महंगाई और चालू खाते के घाटे के बढ़ने की आशंका भी तेज हो गई है. आयात बिल में होने वाला इजाफा देश की अर्थव्‍यवस्‍था पर भी दबाव डाल रहा है. बार्कलेस का कहना है कि क्रूड में 10 डॉलर प्रति बैरल का भी इजाफा होता है तो भारत के चालू खाते का घाटा 9 अरब डॉलर बढ़ जाता है.

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *