बिहार में कॉपियों की कीमत 12 तक बढ़ी, प्लास्टिक और इलेक्ट्रिक सामान के दाम भी उछले

भागलपुर.

खाड़ी क्षेत्र में चल रहे युद्ध से पनपे वैश्विक हालात का असर अब भागलपुर के बाजारों में भी दिखने लगा है। पेट्रोकेमिकल आधारित कच्चे माल की कीमत बढ़ने से कागज, कॉपी, प्लास्टिक और कुछ इलेक्ट्रिक सामान महंगे हो गए हैं। स्कूलों में नया सत्र शुरू हो रहा है। सभी अभिभावकों को कॉपी खरीदनी ही है।

इसी वक्त कॉपियों की कीमतों में बढ़ोतरी से अभिभावकों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। भागलपुर में कॉपियों की कीमतें अचानक 12 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। हालांकि, थोक और खुदरा बाजार में कीमतों में अंतर होने से ग्राहकों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दुकानदारों की मानें तो कागज बनाने में कई पेट्रोकेमिकल आधारित रसायनों का उपयोग होता है। इन रसायनों का कच्चा माल खाड़ी देशों से आता है। वैश्विक तनाव के कारण इनकी लागत बढ़ने से कागज और कॉपियों की कीमतों में तेजी आई है।

कोतवाली चौक के समीप कॉपियों के थोक विक्रेता गोपाल खेत्रीवाल ने बताया कि कई कंपनियों ने एमआरपी बढ़ा दी है। इससे बाजार में नई कॉपियां महंगी हो गई हैं। पहले 120 पेज की कॉपी का एमआरपी 32 रुपये था। इसे बढ़ाकर अब 40 रुपये कर दिया गया है। इसी तरह 172 पेज की कॉपी का एमआरपी पहले 52 रुपये था, जो अब बढ़कर 60 रुपये हो गया है। जेराक्स के लिए इस्तेमाल होने वाले ए-4 साइज पेपर की कीमत भी बढ़ गई है। पहले इसका थोक भाव 175 रुपये था, अब बढ़कर 190 रुपये हो गया है।

कीमतों में नहीं दिख रही एकरूपता
एमआरपी बढ़ने के बाद खुदरा दुकानदार भी कॉपियां बढ़ी हुई कीमतों पर बेचने लगे हैं। इस कारण कीमतों में एकरूपता नहीं दिख रही है। स्कूलों से जुड़े विक्रेता कॉपियों पर करीब 10 प्रतिशत की छूट दे रहे हैं, जबकि खुदरा बाजार में ग्राहकों को एमआरपी पर 30 प्रतिशत तक की छूट दी जा रही है। कुछ थोक विक्रेता भी खुदरा की तरह सीधे ग्राहकों को कॉपियां बेच रहे हैं। गोपाल खेत्रीवाल के अनुसार, कॉपियों पर अभी भी 50 प्रतिशत तक का डिस्काउंट मिल रहा है। सुबोध कुमार ने बताया कि कई दुकानदार बढ़ी हुई एमआरपी पर ही कॉपियां बेच रहे हैं। स्कूल सत्र शुरू होने के साथ ही बाजार में कॉपियों की मांग बढ़ गई है। फरवरी, मार्च और अप्रैल में कॉपियों की बिक्री सबसे अधिक होती है और साल का लगभग 40 प्रतिशत व्यापार इसी अवधि में हो जाता है। दूसरी ओर, अभिभावक संजय कुमार ने बताया कि कुछ दिन पहले कॉपी खरीदने की योजना थी, लेकिन किसी कारण से खरीद नहीं पाए। अब पांच से आठ रुपये बढ़ी हुई कीमतों पर कॉपी खरीदनी पड़ी।

रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम 20 प्रतिशत तक बढ़े
बाजार में प्लास्टिक और इलेक्ट्रिक सामान की कीमतों में भी तेजी आई है। गुरुद्वारा रोड स्थित प्लास्टिक विक्रेता आकाश कुमार ने बताया कि अधिकांश सामानों की कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। पहले साधारण प्लास्टिक बाल्टी 100 से 120 रुपये में मिलती थी, अब बढ़कर 130 से 140 रुपये हो गई है। बैठने वाला प्लास्टिक स्टूल पहले करीब 150 रुपये में मिलता था, अब 170 से 180 रुपये में बिक रहा है। डस्टबिन की कीमत 150 से 170 रुपये से बढ़कर 180 से 200 रुपये तक पहुंच गई है। किचन में इस्तेमाल होने वाला कंटेनर पहले 50 रुपये में मिल जाता था, अब 60 से 65 रुपये में बिक रहा है। प्लास्टिक मग, जो पहले 20 रुपये में मिलता था, अब 25 से 30 रुपये तक पहुंच गया है। आकाश के अनुसार ये रोजमर्रा के उपयोग के कम कीमत वाले सामान हैं, इसलिए बिक्री पर फिलहाल ज्यादा असर नहीं पड़ा है। लोग जरूरत के हिसाब से इन्हें खरीद रहे हैं और बाजार में मांग सामान्य बनी हुई है।

दूसरी ओर, गर्मी के मौसम को देखते हुए इलेक्ट्रिक सामान की मांग भी बढ़ने लगी है। दुकानदारों के अनुसार पंखों की कीमत में भी तेजी आई है। एक ब्रांड का पंखा जो पहले 1250 रुपये में मिलता था, अब 1450 से 1500 रुपये में बिक रहा है।

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