मध्य प्रदेश में LPG संकट, कमर्शियल सिलेंडर का सिर्फ दो दिन का स्टॉक, 15 लाख उपभोक्ताओं पर असर

भोपाल
ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच जारी सैन्य कार्रवाई से पेट्रोलियम की सप्लाई प्रभावित हो रही है। केंद्र के निर्देश के बाद मध्य प्रदेश में कमर्शियल एलपीजी गैस की उपलब्धता को लेकर राज्य सरकार सतर्क हो गई है। प्रदेश के डीलर्स के पास कमर्शियल सिलेंडर का करीब दो दिन का ही स्टॉक बचा है। कमर्शियल सिलेंडर की कमी से प्रदेश के करीब 15 लाख व्यावसायिक उपभोक्ता प्रभावित हो सकते हैं। ऐसी स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रियों की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही प्रदेश के सभी कलेक्टरों को कमर्शियल संस्थानों के साथ बैठक कर गैस का विवेकपूर्ण उपयोग सुनिश्चित कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त स्टॉक
सरकार के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में एलपीजी, सीएनजी और पीएनजी गैस की आपूर्ति फिलहाल सामान्य रूप से जारी है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। गैस की आपूर्ति में किसी प्रकार की समस्या नहीं है। प्रदेश में एलपीजी उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 1 करोड़ 90 लाख के आसपास है, जिनमें से करीब 92 प्रतिशत उपभोक्ता घरेलू श्रेणी के हैं। वहीं, बाकी आठ प्रतिशत यानी करीब 15 लाख कमर्शियल उपभोक्ता हैं।
उद्योग हो सकते हैं प्रभावित
कमर्शियल उपयोग की बात करें तो प्रदेश में एलपीजी का केवल 5 से 7 प्रतिशत उपयोग कमर्शियल क्षेत्र में होता है। अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए करीब दो से तीन दिन का स्टॉक उपलब्ध है। वहीं, ऑयल कंपनियों के पास औसतन 6 से 7 दिन का स्टॉक रहता है। उन्होंने बताया कि फिलहाल होटल, रेस्टारेंट और उद्योगों को दूसरे विकल्पों का उपयोग करने के लिए कहा गया है। इसमें सबसे अधिक उद्योगों के प्रभावित होने की बात सामने आर ही है।
शादी-समारोहों पर असर पड़ना तय
कमर्शियल गैस की सीमित उपलब्धता का असर होटल व्यवसाय और शादी-समारोहों की तैयारियों पर पड़ना तय माना जा रहा है। वहीं घरेलू गैस सिलेंडरों को लेकर भी नए नियम लागू किए गए हैं। पहले जहां उपभोक्ता 21 दिन के अंतराल में सिलेंडर बुक कर सकते थे, अब बुकिंग के लिए 25 दिन का अंतराल तय किया गया है। इसके साथ ही एक उपभोक्ता को एक महीने में एक से अधिक सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।
कलेक्टरों को दिए गए निर्देश
सरकार ने सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में होटल, रेस्टोरेंट और अन्य वाणिज्यिक संस्थानों के साथ बैठक कर उन्हें स्थिति से अवगत कराएं और गैस का विवेकपूर्ण व सीमित उपयोग सुनिश्चित कराएं। आवश्यकता पड़ने पर इलेक्ट्रिसिटी सहित अन्य वैकल्पिक साधनों के उपयोग को भी प्रोत्साहित करने को कहा गया है। वहीं, अस्पताल और शैक्षणिक सेवाओं के लिए कमर्शियल गैस की सप्लाई फिलहाल जारी रहेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि बाजार में गैस की काला बाजारी रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जा रही है। यदि जरूरत पड़ी तो वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
पेट्रोल का 15 दिन का स्टॉक
वहीं, अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में पेट्रोल का 15 दिन का स्टॉक हैं। इसके अलावा सप्लाई जारी है। वहीं, पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने साफ किया है कि फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है। उन्होंने लोगों को अफवाहों से बचने की सलाह दी गई है। मध्य प्रदेश पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा है कि प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। डिपो में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। बता दें मध्य प्रदेश में सालाना पेट्रोल की खपत करीब 1200 मीट्रिक टन और डीजल की खपत करीब 1600 मीट्रिक टन है।
मुख्यमंत्री ने बनाई समन्वय समिति
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पेट्रोलियम से जुड़ी गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने केंद्र सरकार और प्रदेश के बीच समन्वय के लिए मंत्रिगण की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह समिति गैस आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर विभाग और केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर आगे की रणनीति तय करेगी।



