राजस्थान के किसानों को बड़ी राहत, अब सिर्फ 5 रुपए में होगी मिट्टी की जांच

झालावाड़.

झालावाड़ जिले के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। अब मात्र 5 रुपए खर्च कर खेत की मिट्टी की सेहत की जांच करवाई जा सकती है। सरकार की मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। कृषि विभाग के अनुसार जिले में किसानों को जागरुक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

इसके तहत किसान मिट्टी का नमूना लेकर नजदीकी कृषि प्रयोगशाला में जमा करवा सकते हैं। जांच के बाद उन्हें एक मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिया जाएगा, जिसमें मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म तत्वों की स्थिति का पूरा विवरण होगा।

ऐसे लें नमूना
खेत के चारों ओर कोने की मेड़ से एक मीटर जगह छोड़कर 9 इंच गहराई का गहरा गड्ढा खोदकर बीच की मिट्टी को निकाले एवं एक गड्ढा खेत के मध्य से वी आकार का खोदे और मिट्टी निकाले। इसके बाद खुरपी की सहायता से वी आकार के गड्ढे से मिट्टी को बारीक कूटकर पीस लें, महीन बना लें एवं बराबर चार भागों में बांटे। अपने सामने के हिस्सों को छोड़ दें एवं दो हिस्से लेकर पुन: चार भागों में बांटकर एक हिस्सा 500 ग्राम का लेकर बायोडिग्रेडबल थैली में भरें। उसके ऊपर एक लेबल लगाएं। जिस पर कृषक का नाम, मय पिता का नाम, खेत का नाप, खसरा, सिंचित, असिंचित का उल्लेख कौनसी फसल जांच से पूर्व ली तथा आगामी फसल जो लेनी है उसका उल्लेख करें एवं एक लेबल थैली के अंदर रखें।

ये मिलेगा फायदा
मृदा स्वास्थ्य कार्ड मिलने के बाद किसान यह जान पाएंगे कि उनकी जमीन में किस पोषक तत्व की कमी या अधिकता है। इसके आधार पर वे सही मात्रा में उर्वरकों का उपयोग कर सकेंगे। इससे फसल उत्पादन बढ़ेगा और लागत भी कम होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि बिना जांच के अंधाधुंध खाद डालने से मिट्टी की उर्वरता घट रही है, जिसे यह योजना सुधारने में मददगार साबित होगी। खाद एवं उर्वरकों की संतुलित उपयोग सिफारिश अनुसार उर्वरक उपयोग करने से उर्वरक एवं लागत में कमी तथा उत्पादन में वृद्धि होगी। समस्या ग्रसित जमीनों की पहचान होने पर भूमि सुधार किया जाना आसान होगा।

भौगोलिक रासायनिक एवं जैविक गुण धर्मों का सम्भावित प्रभाव जो कि मृदा की उर्वरकता एवं उत्पादकता से परिलक्षित होता है। भौतिक रसायनिक एवं जैविक स्थितियां अनुकुल हो, इसकी जांच भी मृदा जांच से मिलती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि वे हर दो से तीन साल में अपनी मिट्टी की जांच जरुर कराएं। इससे जमीन की सेहत बनी रहेगी और खेती लंबे समय तक टिकाऊ व लाभदायक बनी रहेगी।

मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में जमा कराएं
किसान फसलों में संतुलित खाद एवं उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर मिट्टी की जांच करा सकते हैं। इसके लिए जिन किसानों ने विगत 3 वर्षों में मिट्टी की जांच नहीं कराई है वे अपने खेत से मिट्टी का नमूना लेकर 5 रुपए शुल्क के साथ अपने क्षेत्र के कृषि पर्यवेक्षक को अथवा तबेला हाउस स्थित मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला में जमा करा सकते हैं।
– चौथमल शर्मा, कृषि अधिकारी झालावाड़

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