होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी ऑपरेशन तेज, बारूदी सुरंगों को हटाने की तैयारी

 नई दिल्ली

 पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षा बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सेना ने इस अहम समुद्री रास्ते में बिछी संभावित बारूदी सुरंगों को हटाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए उन्नत युद्धपोत, ड्रोन और हेलिकॉप्टर तैनात किए गए हैं।

अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के तहत दो गाइडेड मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत इस ऑपरेशन में शामिल हैं। इनका मुख्य काम समुद्र में छिपी बारूदी सुरंगों का पता लगाना और उन्हें नष्ट करना है, ताकि जहाजों की आवाजाही सुरक्षित हो सके।

अमेरिकी सेना के मुताबिक, यह अभियान खास तौर पर उन सुरंगों को हटाने के लिए है जिन्हें ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जोड़ा जा रहा है। ये सुरंगें बड़े जहाजों और तेल टैंकरों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं।

ड्रोन से होगी समुद्र की जांच
अमेरिका इस काम के लिए सीधे जहाजों को खतरे में नहीं डाल रहा है। इसके बजाय पानी के अंदर चलने वाले रोबोटिक ड्रोन यानी यूयूवी (अनमैन्ड अंडरवाटर व्हीकल) का इस्तेमाल किया जा रहा है।

ये ड्रोन टॉरपीडो के आकार के होते हैं और अपने आप समुद्र में घूमकर हाईटेक सोनार तकनीक से समुद्र की सतह का नक्शा बनाते हैं। इससे छिपी हुई बारूदी सुरंगों का पता लगाया जाता है।

हेलिकॉप्टर भी निभा रहे अहम भूमिका
इसके अलावा अमेरिका ने एमएच-60एस जैसे हेलिकॉप्टर भी तैनात किए हैं। ये हेलिकॉप्टर खास लेजर सिस्टम (एएलएमडीएस) की मदद से समुद्र की सतह या उसके ठीक नीचे मौजूद सुरंगों को पहचान सकते हैं।

जब किसी सुरंग का पता चलता है, तो उसे नष्ट करने के लिए एक और रिमोट कंट्रोल सिस्टम (एएमएनएस) का इस्तेमाल किया जाता है। यह छोटा रोबोट सुरंग के पास जाकर उसे विस्फोट से खत्म कर देता है।

सुरक्षा के साथ-साथ रक्षा भी
ये युद्धपोत सिर्फ सुरंग हटाने में मदद नहीं कर रहे, बल्कि सुरक्षा भी दे रहे हैं। इनमें आधुनिक एजिस कॉम्बैट सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलें लगी हैं, जो हवाई या समुद्री हमलों को रोक सकती हैं।

अमेरिकी एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि नया सुरक्षित समुद्री रास्ता तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द ही जहाजों के लिए खोला जाएगा ताकि व्यापार सामान्य हो सके।

क्यों अहम है यह ऑपरेशन?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का बेहद अहम तेल मार्ग है, जहां से करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई होती है। हाल के संघर्ष के चलते यहां करीब 800 जहाज फंसे हुए हैं।

ईरान द्वारा रास्ता बाधित किए जाने के बाद हालात और बिगड़ गए हैं, जिससे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। ऐसे में इस रास्ते को सुरक्षित बनाना पूरी दुनिया के लिए जरूरी हो गया है।

 

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