सतना के 17 मेधावी छात्रों को ISRO और श्रीहरिकोटा यात्रा का मौका, 20 अप्रैल से शुरू होगी विज्ञान मंथन यात्रा

सतना 

मध्यप्रदेश के सतना के मेधावी छात्रों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (MP CST) की विज्ञान मंथन यात्रा के तहत व्यंकट-वन स्कूल के 17 स्टूडेंट्स का सिलेक्शन हुआ है।

ये होनहार बच्चे अब बेंगलुरु स्थित ISRO हेडक्वार्टर और श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर की सैर करेंगे। 95% से ज्यादा नंबर लाने वाले इन छात्रों को रॉकेट साइंस और अंतरिक्ष की बारीकियों को लाइव समझने का शानदार मौका मिलेगा।

छात्र 20 से 27 अप्रैल तक देश की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के बेंगलुरु (कर्नाटक) मुख्यालय और श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) की सैर करेंगे।

दल के लिए रसायन विज्ञान के शिक्षक डॉ. रामानुज पाठक और भौतिक विज्ञान की शिक्षिका नविता जायसवाल को ग्रुप हेड नियुक्त किया गया है, जिनके नेतृत्व में विद्यार्थी प्रयोग, अवलोकन और विश्लेषण की वैज्ञानिक पद्धति को प्रत्यक्ष रूप से समझेंगे।

95% से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों का होता है चयन
एमपी सीएसटी की विज्ञान मंथन यात्रा के लिए प्रदेश के एमपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई के विज्ञान संकाय के 10वीं, 11वीं और 12वीं के मेधावी छात्र-छात्राओं का चयन होता है। इसमें वे विद्यार्थी पात्र होते हैं जिन्होंने अपनी पिछली कक्षा में 95 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हों।

विज्ञान मंथन के लिए चयनित विद्यार्थियों के लिए बाद में एक परीक्षा भी आयोजित की जाती है। इस परीक्षा में सफल होने वाले प्रतिभागियों को 5 साल तक प्रतिमाह 1200 से 1500 रुपए की छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाती है।

व्यंकट-वन स्कूल के इन विद्यार्थियों को मिला अवसर
एक्सीलेंस स्कूल व्यंकट-1 से चयनित छात्र-छात्राओं में 12वीं कक्षा से तोषी गौतम, पल्लवी राठौड़, ऋषिका त्रिपाठी और रुद्राक्ष त्रिपाठी शामिल हैं। 11वीं कक्षा से आदित्य पांडेय, अखंड प्रताप यादव, कंचन चौधरी, रितिक तिवारी और नेहा पटेल का चयन हुआ है। वहीं, 10वीं कक्षा से कृष्णा गुप्ता, मोहिना गुप्ता, प्राची कुशवाहा, राधे गुप्ता और अंशराज सिंह तोमर को यह अवसर मिला है।

प्राचार्य बोले- नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना है उद्देश्य
एक्सीलेंस स्कूल के प्राचार्य केएस बघेल ने बताया कि, "मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा आयोजित विज्ञान मंथन यात्रा का उद्देश्य राज्य में वैज्ञानिक चेतना का प्रसार और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना है। स्कूली बच्चों में वैज्ञानिक प्रतिभा की पहचान, उनमें वैज्ञानिक समझ को सुदृढ़ करना और उन्हें वैज्ञानिक विकास की सक्रिय भागादारी के प्रति प्रेरित करना है।" यह 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत राज्य सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना है।

ISRO-श्रीहरिकोटा टूर का पूरा शेड्यूल
ये शानदार साइंटिफिक जर्नी 20 अप्रैल से शुरू होकर 27 अप्रैल तक चलेगी। इस दौरान बच्चे बेंगलुरु स्थित इसरो (ISRO) के मुख्यालय का दौरा करेंगे। साथ ही वे श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) भी जाएंगे।

वहां वे देखेंगे कि रॉकेट और सैटेलाइट कैसे काम करते हैं। इस टीम की लीडरशिप केमिस्ट्री के टीचर डॉ. रामानुज पाठक करेंगे। उनके साथ फिजिक्स की टीचर नविता जायसवाल भी मौजूद रहेंगी।

  • व्यंकट-वन स्कूल के इन बच्चों ने किया नाम रोशन
  •     व्यंकट-वन स्कूल के कई होनहार बच्चों ने इस लिस्ट में जगह बनाई है। 
  •     12वीं कक्षा से तोषी, पल्लवी, ऋषिका और रुद्राक्ष का चयन हुआ है। 
  •     11वीं से आदित्य, अखंड, कंचन, रितिक और नेहा को अवसर मिला है। 
  •     वहीं 10वीं कक्षा से कृष्णा, मोहिना, प्राची, राधे और अंशराज शामिल हैं। 
  •     ये सभी बच्चे अंतरिक्ष विज्ञान को करीब से देखने के लिए उत्साहित हैं।

किसे मिलता है विज्ञान मंथन यात्रा का मौका
इस यात्रा के लिए चयन की प्रक्रिया बहुत ही कड़ी होती है। केवल वही छात्र इसके लिए एलिजिबल होते हैं जिनके नंबर 95% से अधिक हों। इसमें एमपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई के विज्ञान छात्र शामिल होते हैं। 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा के मेधावी छात्रों को प्रॉयोरिटी दी जाती है। ये बच्चों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने की एक बहुत अच्छी पहल है।

साइंटिफिक कॉन्शसनेस को बढ़ावा देना है लक्ष्य
विज्ञान मंथन यात्रा (Vigyan Manthan Yatra) सिर्फ एक टूर या सैर-सपाटा नहीं है। चयनित विद्यार्थियों के लिए बाद में एक विशेष परीक्षा आयोजित की जाएगी। जो छात्र इस परीक्षा को पास करेंगे, उन्हें स्कॉलरशिप दी जाएगी। उन्हें अगले 5 साल तक पर मंथ 12 सौ से 15 सौ रुपए मिलेंगे। 

इससे उनकी आगे की पढ़ाई में काफी मदद मिल सकेगी। स्कूल के प्राचार्य केएस बघेल ने इस अचीवमेंट पर खुशी जताई है। उन्होंने बताया कि इस टूर का मेन ऑब्जेक्टिव साइंटिफिक कांशसनेस फैलाना है। ये योजना 11वीं फाइव ईयर प्लान के तहत शुरू की गई थी।

ISRO क्या है?
ISRO का फुल फॉर्म Indian Space Research Organisation है। सरल शब्दों में कहें तो यह भारत की एक सरकारी संस्था  है जो अंतरिक्ष यान, सैटेलाइट और रॉकेट बनाने का काम करती है। इसका हेडक्वार्टर बेंगलुरु में है।

इसरो का काम है नई-नई टेक्नोलॉजी विकसित करना, जैसे कि चंद्रयान या मंगलयान। यह वो 'दिमाग' है जो पूरी प्लानिंग करता है कि भारत स्पेस की दुनिया में कैसे आगे बढ़ेगा।

श्रीहरिकोटा क्या है?
श्रीहरिकोटा असल में एक जगह का नाम है, जो आंध्र प्रदेश के तट पर स्थित एक छोटा सा आइलैंड है। यहां पर इसरो का Sathish Dhawan Space Centre (SDSC) बना हुआ है। आप इसे भारत का 'रॉकेट पोर्ट' कह सकते हैं।

इसरो जो भी रॉकेट या सैटेलाइट बनाता है, उसे लॉन्च करने के लिए श्रीहरिकोटा लाया जाता है। यहां से रॉकेट अंतरिक्ष में उड़ान भरते हैं। समुद्र के किनारे होने के कारण यह जगह रॉकेट लॉन्चिंग के लिए सबसे सुरक्षित और सही मानी जाती है।

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