मोदी का विदेश दौरा: चार यूरोपीय देशों के साथ UAE भी संभावित

नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 के मध्य यूरोप के चार देशों की अहम यात्रा पर जाएंगे. कूटनीति के मोर्चे पर मई का महीना भारत के लिए अहम होने जा रहा है। इस दौरान इटली, वेटिकन, नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड जैसे देशों के साथ ट्रेड, रक्षा सहयोग, यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर चर्चा होने की संभावना है। PM मोदी के यूरोप की यात्रा के दौरान संयुक्त अरब अमीरात में भी कुछ देर रुकने की उम्मीद है।

पीएम मोदी मई 2026 में चार मध्य यूरोप के चार देशों की यात्रा पर जा रहे हैं. इस चार देशों की यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार, तकनीकी सहयोग और रणनीतिक साझेदारी जैसे कई मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है.

 ईरान-अमेरिका-इजरायल में तनाव के बीच कूटनीति के मोर्चे पर मई का महीना भारत के लिए अहम होने जा रहा है। अमेरिका के साथ कम होते भरोसे के बाद यूरोपीय देशों भारत की तरफ नजर बना रहे हैं, क्योंकि एशिया में भारत के साथ साझेदारी दोनों ही पक्षों के लिए एक फायदा का सौदा साबित हो सकती है.

ट्रंप प्रशासन के बढ़ते दबाव के बीच भारत-यूरोप संबंधों ने लगातार स्थिर प्रगति की है. अब मध्य यूरोप के इन चार देशों का दौरा भी इस प्रगति में एक और कदम माना जा रहा है.

प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार वह 15-17 मई तक नीदरलैंड, 17 मई को स्वीडन, 17-19 मई तक नॉर्वे और 19-20 मई तक इटली का दौरा करेंगे. इस चार देशों की यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों, व्यापार, तकनीकी सहयोग और रणनीतिक साझेदारी जैसे कई मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है.

15 मई को ओस्लो में होने वाला तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन, जिसमें भारत, डेनमार्क, आइसलैंड, नॉर्वे, स्वीडन और फिनलैंड के नेता एक साथ जुटेंगे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूरोप दौरे का मुख्य एजेंडा है।

भारत के नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली के साथ मजबूत राजनयिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंध हैं. ये यूरोपीय देश भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं, नीदरलैंड EU में सबसे बड़ा, इटली चौथा, सेमीकंडक्टर, जल प्रबंधन, रक्षा, हरित ऊर्जा, नवाचार और जलवायु पर सहयोग बढ़ रहा है. पीएम मोदी की इस यात्रा से ये संबंध और मजबूत होंगे.

भारत मई 2026 के मध्य से अंत तक नई दिल्ली में ब्रिक्स और क्वाड के विदेश मंत्रियों की अहम बैठकों की मेजबानी करने के लिए तैयार है, जिससे देश जटिल भू-राजनीति के केंद्र में आ जाएगा।

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