4 बड़ी खुशखबरियों से शेयर बाजार में रॉकेट जैसी तेजी, अब निवेशकों को इस एक फैसले का इंतजार

 नई दिल्ली

कारोबारी हफ्ते के पहले दिन शेयर बाजार में जश्न का माहौल है, सेंसेक्स 860 अंक और निफ्टी 260 अंक उछलकर कारोबार कर रहा है. दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच पिछले साढ़े तीन महीने से जारी संघर्ष आखिरकार समाप्त होने जा रहा है. दोनों देशों के बीच एक शांति समझौता हो गया है. फिलहाल बाजार में तेजी के पीछे ये 4 बड़े कारण हैं, जिसने निवेशकों के सेंटिमेंट को सुधार दिया है. वहीं, बाजार अब 5वीं बड़ी खबर का इंतजार कर रहा है। 

आइए एक-एक कर जानते हैं कि बाजार में तेजी के पीछे क्या कारण हैं..
1. होर्मुज का खुलना

पिछले तीन महीनों से पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण होर्मुज रूट बाधित चल रहा था. रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक ऐतिहासिक शांति समझौते और नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने की घोषणा के बाद, इस रूट को पूरी तरह से व्यापार के लिए खोल दिया गया है. वैश्विक व्यापार के लिए यह इस साल की सबसे बड़ी राहत है. दुनिया का 20% से अधिक कच्चा तेल और LNG इसी रास्ते से गुजरता है, इसके खुलने से सप्लाई चेन ठप होने का डर पूरी तरह खत्म हो गया है. जिसने भारतीय बाजार में चौतरफा लिवाली को बढ़ावा दिया है। 

2. कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट
होर्मुज संकट टलने का सीधा असर कमोडिटी मार्केट पर देखने को मिला है. अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतें 5% से अधिक टूटकर $83 प्रति बैरल के पास आ गई हैं. भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में तेल का सस्ता होना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी बूस्टर डोज से कम नहीं है. इससे देश का आयात बिल घटेगा, चालू खाता घाटा (CAD) नियंत्रण में आएगा। 

3. डॉलर के मुकाबले रुपये की रिकॉर्ड मजबूती
कच्चे तेल में गिरावट और वैश्विक बाजार में डॉलर इंडेक्स के सुस्त पड़ने से भारतीय रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जबरदस्त मजबूती का प्रदर्शन कर रहा है. रुपया मजबूत होकर 94.50 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है. रुपये की इस मजबूती से विदेशी निवेशकों (FIIs) का भरोसा भारतीय बाजार में फिर से लौट आया है, क्योंकि इससे उन्हें करेंसी डेप्रिसिएशन (मुद्रा के अवमूल्यन) का जोखिम कम हो जाता है. साथ ही, आयात होने वाली जरूरी वस्तुओं की लागत घटने से घरेलू स्तर पर महंगाई को रोकने में मदद मिलेगी। 

4. बॉन्ड टैक्स कटौती से FII की बिकवाली थमी
घरेलू मोर्चे पर सरकार और नीति निर्माताओं द्वारा बॉन्ड मार्केट पर टैक्स ढांचे में किए गए हालिया सुधार और कटौती का बड़ा असर दिख रहा है. पिछले कुछ महीनों से विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार पैसे निकाल रहे थे, लेकिन बॉन्ड टैक्स में राहत मिलने के बाद फिक्स्ड इनकम और इक्विटी मार्केट दोनों में विदेशी फंड्स का आउटफ्लो न के बराबर रह गया है. FIIs अब आक्रामक शॉर्ट-कवरिंग कर रहे हैं। 

अब इस एक खबर का इंतजार (भारत-अमेरिका ऐतिहासिक ट्रेड डील)
बाजार में आई इस शुरुआती तेजी के बीच अब निवेशकों की नजरें उस पांचवें और सबसे निर्णायक ट्रिगर पर टिकी हैं, जो इस रैली को एक नई ऊंचाई पर ले जा सकता है. भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Pact) के अंतिम मसौदे को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है। 

ट्रेड डील से बाजार को क्या उम्मीद?
इस समझौते के तहत अमेरिका में भारतीय निर्यात खासकर टेक्सटाइल, फार्मा, आईटी सर्विसेज और इंजीनियरिंग सामान पर लगने वाली भारी ड्यूटी को कम किया जाना है, जिससे भारतीय कंपनियों को वियतनाम और मेक्सिको जैसे प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले बड़ा एडवांटेज मिलेगा। 

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