अल्पाइन स्कीइंग: बर्फीली ढलानों पर महिलाओं का दमखम, पुरुषों को दी कड़ी चुनौती

नई दिल्ली
'अल्पाइन स्कीइंग' विंटर ओलंपिक का एक मशहूर खेल है, जिसमें स्कीयर बर्फीले पहाड़ों पर ढलानों से तेज गति में फिसलते हुए नजर आता है। गति, संतुलन और तकनीक के इस खेल में डाउनहिल, स्लैलम, जाइंट स्लैलम और सुपर-जी जैसे इवेंट होते हैं। 'अल्पाइन' शब्द का अर्थ ऊंचे पहाड़ों से संबंधित या पर्वतीय क्षेत्रों से जुड़ा है। साल 1800 के आसपास फ्रांसीसी आल्प्स जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में ढलानों पर लोग चढ़ते और उतरते थे। इसी रोमांच के चलते इस खेल का विकास हुआ। इसके बाद नॉर्वे की सेना ने ढलानों पर स्कीइंग को सैन्य कौशल के रूप में विकसित किया। यहीं से आधुनिक स्कीइंग की नींव पड़ी। 19वीं सदी के अंत में आल्प्स में स्कीइंग को एक रोमांचक गतिविधि के रूप में विकसित किया गया। 20वीं सदी की शुरुआत तक महिलाओं ने भी इसमें हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। साल 1924 में स्विट्जरलैंड में पहली महिला अल्पाइन प्रतियोगिता का आयोजन हुआ।
1936 गार्मिश-पार्टेनकिर्चन शीतकालीन ओलंपिक में अल्पाइन स्कीइंग को पहली बार कंबाइंड इवेंट के रूप में शामिल किया गया, जिसमें डाउनहिल और स्लैलम शामिल थे। इसमें पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी हिस्सा लिया। 1952 हेलसिंकी ओलंपिक में जायंट स्लैलम और 1988 के कैलगरी ओलंपिक में सुपर-जी को शामिल किया गया।
डाउनहिल को लंबे ट्रैक पर किया जाता है, जिसे पूरा करने में डेढ़ मिनट से ज्यादा समय लगता है। इस खेल को अल्पाइन स्कीइंग में सबसे तेज गति का इवेंट माना जाता है। सुपर जाइंट स्लैलम (सुपर-जी) इस खेल का दूसरा सबसे तेज इवेंट है, जिसकी शुरुआत साल 1982 में हुई थी। यह गेट्स की जोड़ी से बने ट्रैक पर होती है। स्कीयर अगर एक भी गेट मिस कर देता है, तो उसे अयोग्य घोषित किया जाता है। इस इवेंट में मोड़ डाउनहिल की तुलना में अधिक चौड़े होते हैं। डाउनहिल की तरह सुपर जी रेस भी एक ही राउंड में होती है। सबसे कम समय में रेस पूरी करने वाले स्कीयर को विजेता घोषित किया जाता है।
स्पेशल स्लैलम सबसे छोटी रेस होती है, जिसमें 50-60 सेकेंड का समय लगता है। इसमें सबसे ज्यादा चौड़े मोड़ होते हैं। स्कीयर एक ढलान पर बने रास्ते से गेट्स के बीच होते हुए नीचे उतरता है। स्लैलम में स्कीयर को इन गेट्स को छूना पड़ता है, जिसके लिए वे खास सुरक्षा उपकरण पहनते हैं। इस इवेंट में एक ही ढलान पर दो अलग-अलग कोर्स पर दो रन होते हैं। दोनों रन के कुल समय को जोड़ा जाता है। सबसे कम समय में रेस पूरी करने वाला विजेता होता है।
जाइंट स्लैलम इवेंट में मोड़ के बीच 20-30 मीटर की दूरी निर्धारित होती है, जिसे पूरा करने में आमतौर पर एक से डेढ़ मिनट लगते हैं। इसके मोड़ स्पेशल स्लैलम की तुलना में चौड़े होते हैं और रास्ता दिखाने के लिए गेट्स का इस्तेमाल किया जाता है। यह रेस भी दो रन में होती है।
अल्पाइन कंबाइंड इवेंट में एक तेज रेस और एक टेक्निकल रेस होती है। दोनों रेस के समय को जोड़कर विजेता का फैसला किया जाता है।
जेरेमी बुजाकोव्स्की 1964 और 1968 शीतकालीन ओलंपिक में अल्पाइन स्कीइंग में भाग लेने वाले पहले भारतीय थे। उनके बाद किशोर रहतना राय (1988), शैलजा कुमार (1988), हिमांशु ठाकुर (2014) और आरिफ खान (2022) ने भी विंटर ओलंपिक में इस खेल में देश का प्रतिनिधित्व किया।
भले ही अब तक भारत इस खेल में ओलंपिक पदक हासिल नहीं कर सका है, लेकिन धैर्य, निवेश और तकनीकी तैयारी के साथ ओलंपिक पदक को 'संभव' बनाया जा सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *