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वन्य जीव संरक्षण की दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व

इंडिया एज न्यूज नेटवर्क

जयपुर : अरावली पर्वत श्रृंखलाओं पर स्थित आरक्षित वन खण्ड आमागढ 1524 हैक्टेयर में फैला हुआ वन क्षेत्र है। यह क्षेत्र जयपुर शहर के पूर्व में स्थित है। प्रदेश के पहले लेपर्ड रिजर्व झालाना व नाहरगढ़ अभयारण्य के मध्य में स्थित होने के कारण यह वन क्षेत्र वन्य जीव संरक्षण एवं कॉरिडोर विकास की दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। आमागढ़ वन खण्ड से लगते हुए ही आरक्षित वन खण्ड लालबेरी 112 हैक्टेयर क्षेत्र में स्थित है। दोनों वन खण्डों का कुल क्षेत्रफल 1636 हैक्टेयर है। जिसकी पैरिफेरी करीब 28.6 किलोमीटर है। लेपर्ड यहां का प्रमुख वन्य जीव है। इस वन क्षेत्र में लगभग 15 लेपर्ड हैं, इसके अलावा मांसाहारी वन्य जीवों में मुख्यतः हायना, जैकाल, जंगली बिल्ली, लोमड़ी व सीवेट कैट हैं। शाकाहारी वन्य प्राणियों में सांभर, नीलगाय, खरगोश आदि वन्य प्राणी हैं। यह वन क्षेत्र एक उष्ण कटिबन्धीय, मिश्रित/पतझड़ /मानसूनी वन क्षेत्र है। यहां मुख्यतः रेतीले प्लेन एरिया में टोटलिस, कुमठा, खेजड़ी पहाड़ी के ढलान पर धौंक, सालर, गोया खैर आदि वनस्पति मौजूद हैं।

पक्षियों में लोकल व माइग्रेटरी बर्डस् सहित करीब 250 प्रकार की प्रजातियां पाई जाती हैं। मोर, तीतर, डव, बैवलर, मैना, पैराकीट, रौबिन, वुड पैकर, बुल-बुल, शिकरा आदि स्थानीय पक्षी हैं। पिट्ठा, पैराडाइज पलाई कैचर, गोल्डन औरियल, पाइड कुक्कू, यूरेशियन कुक्कू, यूरेशियन रौलर, औरियन्ट स्कूप आउल, पैलिड स्कूप आउल, नौर्दन गौसौक, यूरेशियन स्पैरोहीक आदि प्रवासी पक्षी हैं जो देश-विदेश के विभिन्न कोनों से प्रजनन व भोजन की तलाश में आते हैं। आमागढ़ में विभाग द्वारा लेपर्ड कंजर्वेशन के लिए कराए गए कार्याे में मुख्यतः 4 नए वाटर पॉइन्ट का निर्माण, 2 पुराने वाटर पॉइन्ट का पुनरूद्धार, 2 नए बोरवेल कराकर सोलर पैनल लगवाए गए हैं एवं इन वाटर पॉइन्टस पर पाइप लाइन के माध्यम से वन्य जीवों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था की गई है।

इस क्षेत्र में सफारी का आयोजन सुबह और शाम दो पारियों में किया जाएगा। भीड़भाड़ से बचने और पर्यटन को विनियमित करने के लिए प्रत्येक पारी में सीमित संख्या में वाहनों के प्रवेश की अनुमति होगी। पर्यटकों की सुविधा के लिए सफारी टिकट ऑनलाइन उपलब्ध होंगे और बुकिंग वेबसाइट https://sso.rajasthan.gov-in पर की जा सकती है। आमागढ़ सफारी के लिए टिकट खिड़की और प्रवेश द्वार प्रसिद्ध गलता मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर सिसोदिया रानी बाग के ठीक आगे स्थित है।

आकर्षक जंगल में ड्राइव का आनंद लेने और ड्राइव के दौरान तेंदुए, लकड़बग्घा, रेगिस्तानी लोमड़ी और अन्य पक्षियों और जानवरों की तस्वीरें क्लिक करने के अलावा, पर्यटक क्षेत्र के आसपास के कुछ सुंदर दृश्यों का भी आनंद ले सकते हैं। क्षेत्र के आसपास कई किले और मंदिर हैं, जैसे गलता मंदिर, आमागढ़ किला, रघुनाथ किला और अम्बामाता मंदिर। यह वन क्षेत्र झालाना लेपर्ड रिजर्व व नाहरगढ़ अभयारण्य के मध्य स्थित है। इस क्षेत्र में लगभग 15 लेपर्ड का आवास है। विभाग द्वारा प्रोजेक्ट लेपर्ड के तहत वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में किए गए प्रयासों के फलस्वरूप वर्ष 2017 के पश्चात झालाना लेपर्ड रिजर्व में लगातार लेपर्डस की संख्या बढ़ती जा रही है।

वर्ष 2018 में जहां लेपर्डस की संख्या करीब 20 थी, वहीं वर्तमान में सम्पूर्ण क्षेत्र में लेपर्डस की कुल संख्या करीब 40 है। पिछले तीन वर्षों में (जनवरी 2019 से अगस्त 2021 तक) झालाना क्षेत्र में कुल 35 शावकों का जन्म हुआ है। आमागढ़ वन क्षेत्र को लेपर्डस एवं अन्य वन्य प्राणियों ने दूसरे जंगलों में जाने के लिये कॉरिडोर के तौर पर इस्तेमाल किया है, चूंकि झालाना का जंगल केवल 1978 हैक्टेयर है यहां लेपर्ड के लिए सीमित स्थान है अतः सब-एडल्ट लेपर्ड जंगल/आवास की तलाश में आमागढ़ व लालबेरी वन क्षेत्र में आते रहे हैं एवं भविष्य में भी आते रहेंगे। इस प्रकार यहां लेपर्ड की संख्या बढ़ेगी।
(जी.एन.एस)

India Edge News Desk

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