ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट ने जीता उद्योगपतियों का भरोसा: संपतिया उइके

भोपाल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति के मुख्य आतिथ्य में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में विगत दिनों आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की शानदार सफलता ने सारे देश का ध्यान आकर्षित किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने उद्घाटन भाषण और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने समापन भाषण में इस भव्य समिट के आयोजन के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जिस तरह भूरि भूरि प्रशंसा की उसने समिट में पधारे उद्योग जगत की दिग्गज हस्तियों को मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश करने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया। इसमें दो राय नहीं हो सकती कि मुख्यमंत्री पद की बागडोर संभालते ही डॉ. यादव ने यह संदेश दे दिया था कि वे राज्य में औद्योगिक विकास के नये युग की शुरुआत करने के लिए कृत-संकल्प हैं। मध्यप्रदेश को देश का अग्रणी विकसित राज्य बनाने का अपना सुनहरा स्वप्न साकार करने के लिए वे अद्भुत इच्छाशक्ति के साथ अथक परिश्रम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की पहल पर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन के पूर्व मध्यप्रदेश में जो संभाग स्तरीय क्षेत्रीय निवेशक सम्मेलन आयोजित किए गए उनकी सफलता ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के आयोजन की पटकथा पहले ही लिख दी थी। जीआईएस की आशातीत सफलता इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश में डबल इंजन की सरकार में विकास को नई गति मिल रही है। राजधानी भोपाल में संपन्न हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 30 लाख 77 हजार करोड़ रूपये के ऐतिहासिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इस निवेश से प्रदेश में आर्थिक गतिविधियों को जबरदस्त प्रोत्साहन मिलेगा और लाखों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 का उद्घाटन किया और उद्योग, स्टार्टअप और अन्य पर मध्यप्रदेश सरकार की 18 नीतियों का अनावरण किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही मध्यप्रदेश को निवेश केंद्र बनाएगी। विकसित मध्यप्रदेश से विकसित भारत की यात्रा में आज का ये कार्यक्रम बहुत अहम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते 2 दशक में मध्यप्रदेश के लोगों के सपोर्ट से यहां की भाजपा सरकार ने शासन पर फोकस किया। दो दशक पहले तक लोग मध्यप्रदेश में निवेश करने से डरते थे। आज मध्यप्रदेश निवेश आकर्षित करने में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। उन्होंने कहा कि बीते दशक में भारत ने आधारभूत संरचना के विकास में उछाल का दौर देखा है। इसका बहुत बड़ा फायदा मध्यप्रदेश को मिला है। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे का बड़ा हिस्सा मध्यप्रदेश से ही होकर गुजर रहा है। यानी एक तरफ मध्यप्रदेश को मुंबई के पोर्ट के लिए तेज कनेक्टिविटी मिल रही है और दूसरी तरफ उत्तर भारत के बाजार को भी ये कनेक्ट कर रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का लक्ष्य भारत को विनिर्माण केंद्र बनाना है। भोपाल में दो दिवसीय वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन 2025 के समापन समारोह में शाह ने कहा कि कई व्यवसायी अब मध्यप्रदेश में निवेश कर रहे हैं और आने वाले दिनों में यह और बढ़ेगा। गृहमंत्री शाह ने इस बात पर भी जोर दिया कि शिखर सम्मेलन के दौरान 30 लाख 77 हजार करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।इस दो दिवसीय कार्यक्रम में 200 से अधिक भारतीय कंपनियां, 200 से अधिक वैश्विक सीईओ, 20 से अधिक यूनिकॉर्न संस्थापक और पचास से अधिक देशों के प्रतिनिधि मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आए और यह मध्यप्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस ऐतिहासिक निवेश को मध्यप्रदेश की प्रगति के लिए मील का पत्थर बताते हुए ट्वीट किया—"मेरे लिए यह सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि एक मिशन है। मध्यप्रदेश को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का मेरा प्रण और अनथक परिश्रम का प्रतिफल, इस निवेश रूपी वर्षा से ऊर्जा में बदल गया है।" उन्होंने आगे कहा कि मध्यप्रदेश में निवेश के लिए 18 नई नीतियां बनाई गई हैं, जिनके प्रति निवेशकों का जबरदस्त रुझान देखने को मिला है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश, जिसे हिंदुस्तान का दिल कहा जाता है, अपनी समृद्ध प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक विविधता के कारण देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो चुका है। राज्य सरकार के सतत् प्रयासों से मध्यप्रदेश ने पर्यटन क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी यह कह चुके हैं कि मध्यप्रदेश को एक विदेशी मैग्जीन ने दुनिया की श्रेष्ठ टूरिज्म डेस्टिनेशन में से एक माना है। सरकार की योजनाओं से प्रदेश की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को संरक्षण मिल रहा है, जिससे राज्य वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी सशक्त पहचान स्थापित कर रहा है।

मध्यप्रदेश में 24 वन्यजीव अभयारण्य, 12 राष्ट्रीय उद्यान, 9 टाइगर रिज़र्व और 14 विश्व धरोहर स्थल हैं, जो इसे भारत के सबसे समृद्ध जैव विविधता वाले राज्यों में शामिल करते हैं। इसके अलावा, उज्जैन का दक्षिणमुखी महाकालेश्वर और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं।

राज्य सरकार पर्यटन को नए आयाम देने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। पर्यटन परियोजनाओं के लिए 758 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराई गई है, जिसमें से 358 हेक्टेयर भूमि 39 निवेशकों को आवंटित की जा चुकी है। इससे पर्यटन सुविधाओं का विस्तार होगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

राज्य अपनी प्राकृतिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण फिल्म निर्माताओं की पसंदीदा शूटिंग डेस्टिनेशन बन चुका है। अब तक 185 से अधिक फिल्मों और 40 अन्य प्रोजेक्ट्स की शूटिंग मध्यप्रदेश में हो चुकी है। पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने 1,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि चिन्हित की है, जिससे कई नए प्रोजेक्ट्स विकसित होंगे और लाखों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।

निवेशकों ने मध्यप्रदेश में सरकार की 18 नई नीतियों में गहरी रुचि दिखाई है, जिससे उन्हें श्रीमदभगवदगीता के 18 अध्यायों की कर्म और कर्तव्य की प्रेरणा याद आ गई।

जीआईएस 2025 के शुभारंभ अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सानिध्य और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति निवेशकों के लिए सुरक्षा और समृद्धि की गारंटी बन गई। मुख्यमंत्री ने सभी निवेशकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निवेश प्रदेश की प्रगति में मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य की जनता को धन्यवाद देते हुए कहा, "मध्यप्रदेश की 8.50 करोड़ जनता से मेरा वादा है कि हमारी सरकार परफॉर्म भी करेगी, पॉलिसी के माध्यम से रिफॉर्म भी करेगी और उद्योगों से प्रदेश को ट्रांसफॉर्म भी करेगी।"

डबल इंजन सरकार की स्थिरता, निवेशकों के लिए सुरक्षित माहौल और बेहतरीन नीति-निर्माण के चलते मध्यप्रदेश "भारत का औद्योगिक और आर्थिक हब" बनने की ओर अग्रसर है। मध्यप्रदेश की प्रगति की इस ऐतिहासिक यात्रा में निवेशकों, उद्योगपतियों और राज्य की जनता की भागीदारी इसे आत्मनिर्भर भारत के सपने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ा रही है।

 

India Edge News Desk

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