भारत के इतिहास की सबसे बड़ी डील
● नीरज मनजीत
मंगलवार को आख़िर नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में सौहार्द और प्रसन्नता से भरे माहौल में भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच बहुप्रतीक्षित ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर दोनों पक्षों ने दस्तख़त कर दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसे भारत के इतिहास का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कहते हैं। यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहती हैं।
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा एक कदम आगे बढ़कर कहते हैं कि वर्ल्ड आर्डर बदल रहा है और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र तथा बहुपक्षीय विजेता के तौर पर यूरोपियन यूनियन और भारत की यह ज़िम्मेदारी है कि वे संयुक्त राष्ट्र चार्टर को आधार बनाकर अंतरराष्ट्रीय कानून को बनाए रखें। एंटोनिया कोस्टा के इस कथन को डोनाल्ड ट्रंप के मनमाने रवैये के परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है, जिन्होंने अपने अजीबोग़रीब फ़ैसलों से वैश्विक बिरादरी को संशय और भय में डाल दिया है।
इस डील पर समूचे वैश्विक समुदाय की निग़ाहें टिकी हुई थीं। गणतंत्र दिवस के समारोह में उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा को बतौर ख़ास मेहमान बुलाया गया था। इसके पहले ही पिछले हफ़्ते दावोस, स्विट्ज़रलैंड में वर्ल्ड इकोनॉमी फ़ोरम के सम्मेलन में उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस ‘मदर ऑफ आल डील्स’ का ऐलान कर दिया था।
इन समझौतों पर दस्तख़त करते वक़्त हैदराबाद हाउस का माहौल पूरी तरह दोस्ताना और पारिवारिक था। दुनिया की दो महाशक्तियाँ दो परिवारों की तरह एक-दूसरे के समीप आ रही थीं और नज़दीकी रिश्तों का नया इतिहास रच रही थीं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी, उर्सुला और कोस्टा के भावभीने संबोधनों ने एक अलग ही रंग बिखेर दिया।
उर्सुला ने भारत के प्रमुख पर्व मकर संक्रांति का ज़िक्र करते हुए कहा कि–“यह त्यौहार जिस तरह से अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है, उसी तरह यह डील दुनिया को अँधेरे से रौशनी की तरफ़ ले जाएगी। इस डील में दोनों पक्षों की जीत छिपी हुई है। मोदी ने एंटोनिया कोस्टा को लिस्बन का गाँधी निरूपित करते हुए कहा कि–“ग्लोबल ऑर्डर में उथल-पुथल के इस दौर में भारत और ईयू की साझेदारी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की स्थिरता को मजबूत करेगी। कोस्टा ने अपनी जन्मस्थली गोवा का ज़िक्र करते हुए कहा कि वे भारत के नागरिक भी हैं और इस महा-समझौते के बाद दोनों महाशक्तियाँ मिलकर आगे बढ़ेंगी।
इस फ्री ट्रेड डील से भारत और यूरोपीय यूनियन के तक़रीबन 200 करोड़ वासियों को कहीं-न-कहीं फ़ायदा होगा। यूरोपीय यूनियन अमेरिका के बाद विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और क्रय शक्ति के मामले में चीन और अमेरिका के बाद तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
2026 में यूरोपीय संघ की जीडीपी 30.18 ट्रिलियन डॉलर यानी 2766 लाख करोड़ होने का अनुमान है। जबकि फ़िलहाल भारत की जीडीपी 4.18 ट्रिलियन डॉलर यानी लगभग 374.5 लाख करोड़ रुपए है और यह जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
दुनिया की सबसे बड़ी रेटिंग एजेंसियों के मुताबिक भारत की विकास दर आठ फ़ीसदी के क़रीब है और 2030 तक कुल जीडीपी 7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की पूरी उम्मीद है। ज़ाहिर है कि 2030 में भारत की इकोनॉमी जर्मनी को पीछे छोड़कर अमेरिका और चीन के बाद तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुकी होगी।
2024-2025 के आंकड़ों के मुताबिक यूरोपीय संघ के वासियों की कुल क्रय शक्ति तक़रीबन 13.6 ट्रिलियन यूरो यानी 15 लाख करोड़ रुपए है। इस डील के बाद भारतीय उत्पादकों के लिए एक बड़ा बाज़ार खुल जाएगा। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों के बीच 136.53 अरब डॉलर यानी साढ़े बारह लाख करोड़ रुपए का कारोबार हुआ था। इसमें भारत का निर्यात 75.85 अरब डॉलर यानी 6.4 लाख करोड़ रुपए और आयात 60.68 अरब डॉलर यानी 5.1 लाख करोड़ रुपए था।
इसके अलावा यूरोपियन यूनियन ने अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 के बीच 117.4 अरब डॉलर यानी 10.77 लाख करोड़ रुपए निवेश किए हैं। इस डील के बाद यूरोपीय यूनियन के निवेश और आपसी कारोबार में अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी होने का अनुमान है।
फ़िलहाल आस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, साइप्रस, चेक गणराज्य, डेनमार्क, एस्तोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आयरलैंड, ईटली, लातीविया, लिथुआनिया, लक्जमबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवानिया, स्वीडन,.स्पेन और कोएशिया को मिलाकर यूरोपीय यूनियन में कुल 27 देश शामिल हैं। इनके अलावा मकदूनिया, तुर्की, अल्बानिया, बोस्निया हर्जोगोविना, मांटीनीग्रो और सर्बिया भी संभावित सदस्य देशों के रूप में माने जा रहे हैं। इन सारे देशों के वासी अच्छे खासे समृद्ध हैं और भारतीय कंपनियों के लिए अच्छे उपभोक्ता साबित हो सकते हैं।
इस मेगा डील का पूरा श्रेय पीएम मोदी की दूरदर्शिता और बेहतरीन कारोबारी समझ के साथ-साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर तथा उद्योग-वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल एवं उनकी टीम के परिश्रम को दिया जाएगा, जिन्होंने दिन-रात एक करके इसे अंजाम तक पहुंचाया।
ख़ास तौर पर पीएम मोदी की धैर्य, शालीन और मौन कूटनीति की तारीफ़ की जानी चाहिए, जिन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के एकतरफ़ा, अवांछित, अपरिमित दबाब और टैरिफ वॉर में बड़ी जीत हासिल की है। डोनाल्ड ट्रंप पिछले कई महीनों से अपने बेतरतीब बयानों और टैरिफ़ का दबाव डालकर मोदी को परेशानी में डालने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे। यहाँ तक कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को उन्होंने ‘डेड इकोनॉमी’ कह दिया था। उनके सुर में सुर मिलाते हुए यहाँ राहुल गाँधी मोदी को घेर रहे थे। इसके जवाब में मोदी ख़ामोशी से अपना काम करते रहे और परिणाम सबके सामने है।
पीएम मोदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट कर दिया है कि यह डील सिर्फ सामान बेचने-खरीदने तक ही सीमित नहीं रहेगी। भारत और यूरोपीय यूनियन मिलकर समुद्री सुरक्षा, साइबर सिक्योरिटी और आतंकवाद के ख़िलाफ़ रणनीति बनाकर काम करेंगे। इंडो-पैसिफिक इलाके में दोनों महाशक्तियों का सहयोग बढ़ेगा और सबसे बड़ी बात यह है कि भारत की डिफेंस कंपनियां यूरोपीय देशों के साथ मिलकर रक्षा उपकरणों का साझा विकास कर सकेंगी।