पूर्व राष्ट्रपति का बड़ा बयान: मेरे जीवन में दो डॉक्टरों का योगदान, RSS में नहीं जातीय भेदभाव

नागपुर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित सालाना दशहरा उत्सव में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि संघ में जातीय भेदभाव नहीं होता, जबकि देश में एक बड़े वर्ग में यह भ्रांति है कि यहां जातीय भेदभाव किया जाता है। नागपुर के ऐतिहासिक रेशमबाग मैदान में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनके जीवन में नागपुर की दो महान विभूतियों का अहम योगदान है।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी जिंदगी पर दो डॉक्टरों की अमिट छाप रही है। उनमें एक हैं डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और दूसरे हैं डॉ. बाबा साहब भीमराव आंबेडकर। उन्होंने कहा कि उनके जीवन निर्माण में इन दोनों महान विभूतियों का विशेष योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक हैं, जबकि डॉ. आंबेडकर ने इस देश को समृद्ध संविधान दिया, जिसकी बदौलत वह एक आमजन होते हुए भी देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंच सके। कोविंद ने कहा कि डॉ. आंबेडकर की चिंताएँ और विचार प्रक्रिया डॉ. हेडगेवार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसी ही थी। उन्होंने कहा कि जैसे आंबेडकर ने समाज के सभी वर्गों को जोड़ने पर जोर दिया था, उसी तरह संघ भी एकात्मता स्तोत्र के जरिए यही संदेश देता है। उन्होंने कहा कि संघ की समावेशी दृष्टि इसका प्रमाण है। कोविंद ने आगे कहा कि हमारी इस एकता के आधार को बाबा साहब आंबेडकर ने inherent cultural unity (अंतर्निहित सांस्कृतिक एकता) कहा है। उन्होंने कहा कि हमें इसी सांस्कृतिक सामूहिक एकता की आधारशिला को कभी नहीं भूलना चाहिए।

अटलजी को भी किया याद
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने संघ की स्थापना के लिए सबसे शुभ और सार्थक दिन चुना। अपने संबोधन के दौरान पूर्व राष्ट्रपति ने डॉक्टर हेडगेवार से लेकर मोहन भागवत तक संघ के अब तक के सफर में सरसंघचालकों के योगदान भी गिनाए। अपने संबोधन के दौरान रामनाथ कोविंद ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को उद्धृत किया और एक सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल जी ने दलित विरोधी आरोपों पर स्पष्ट किया था कि हम मनुस्मृति के नहीं, बल्कि भीम स्मृति के अनुयायी हैं और यही भारत का संविधान है। भीम स्मृति से तात्पर्य संविधान से है, जिसका निर्माण बाबा साहब आंबेडर ने किया था।

संघ से कब हुआ पहला परिचय?
कोविंद ने अपने जीवन के उन पलों को भी याद किया जब संघ से उनका पहली बार परिचय हुआ था। उन्होंने कहा कि 1991 में वह कानपुर के घाटमपुर विधानसभा सीट से उत्तर प्रदेश विधानसभा का चुनाव लड़ रहे थे। तब वह भाजपा के उम्मीदवार थे। उसी समय चुनाव प्रचार के दौरान संघ के अधिकारियों और स्वयंसेवकों से उनका पहली बार परिचय हुआ था। कोविंद ने कहा कि संघ के लोगों ने जातिगत भेदभाव से रहित होकर उनका चुनाव प्रचार किया था। उन्होंने दो टूक कहा कि संघ में जातीय आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता बल्कि संघ सामाजिक एकता का पक्षधर रहा है। कोविंद ने कहा कि उनकी जीवन यात्रा में स्वयंसेवकों के साथ जुड़ाव और मानवीय मूल्यों से बड़ी प्रेरणा मिली है और इसका उल्लेख उन्होंने अपनी आत्मकथा में किया है, जो इस साल के अंत तक प्रकाशित हो जाएगी।

 

India Edge News Desk

Follow the latest breaking news and developments from Chhattisgarh , Madhya Pradesh , India and around the world with India Edge News news desk. From politics and policies to the economy and the environment, from local issues to national events and global affairs, we've got you covered.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *