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किसानों के लिए करगर है वर्षा जल का उपयोग

रामजी लाल मीना

आज की दुनिया में पानी का उपयोग घर, कृषि और व्यापार के क्षेत्रा में अत्यधिक उपयोग में लाया जाने लगा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी अत्यधिक बोरवेल स्थापित हो जाने पर भी मिट्टी के अंदर जल स्तर कम होने लगा है और कुछ जगहों पर तो कई बोरवेल बंद भी हो चुके हैं। ऐसे में पानी को संरक्षित अथवा जल संरक्षण के विषय में हमें जल्द से जल्द सोचना होगा। जल ही जीवन है। आज ना सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में बोरवेल बल्कि शहरी क्षेत्रों में कई बड़े कल कारखानों में पानी का उपयोग होने के कारण भी पानी की किल्लत होने लगी है।

दौसा जिले को भू जल वैज्ञानिकों ने डार्क जोन घोषित कर दिया है। जिले के सभी उपखण्डों, तहसील एवं पंचायत समिति स्तर सहित शहर सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की समस्या का सामना करना पड रहा है। आमजन की प्यास बुझाने के लिये जलदाय विभाग द्वारा टैंकरों के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। जिले में कुओं एवं बावड़ियों का जल सूख गया है। जानवरों के लिये भी पीने का पानी उपलब्ध करवाना आमजन को भारी पड़ रहा है। सिंचाई के लिये भी अब पर्याप्त मात्रा में पानी नही रहा है। बोरिंग सूख गये हैं तथा जल स्तर बहुत नीचे जा चुका है।

दौसा जिले में जल स्तर को गिरते देख तथा पेयजल समस्या को देखकर जिला कलक्टर कमर चौधरी ने वर्षा के बहते जल का संरक्षण करने के लिये एक अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत वाटर हार्वेस्टिंग, पुराने कुओं एवं बावड़ियों की सफाई एवं खुदाई के कार्य को प्राथमिकता से लिया गया है। अभियान का शुभारम्भ 29 मई 2022 को जिला कलक्टर कमर चौधरी व पुलिस अधीक्षक राजकुमार गुप्ता ने किला सागर दौसा में बने एनिकट की सफाई एवं खुदाई के कार्य से किया। इस कार्यक्रम में जिला कलक्टर ने स्वयं फावड़ा एवं गैंती लेकर एनिकट में खुदाई का कार्य करना चालू किया तो उनके सहयोग के लिये सभी सरकारी अधिकारी, कर्मचारी, पुलिस के अधिकारी एवं कर्मचारियों सहित क्षेत्राीय जनप्रतिनिधिगण एवं गणमान्य नागरिकों ने भी सहयोग प्रदान कर एनिकट की सफाई एवं खुदाई में सहयोग प्रदान किया गया। अभियान के दूसरे रविवार यानि 5 जून 2022 को ग्राम पंचायत भांकरी में बालाजी वाली बावड़ी की सफाई एवं खुदाई कार्य में जिला प्रशासन के सहयोग के लिये लोगों का तांता लग गया। बावड़ी की सफाई एवं खुदाई के लिये महिला एवं पुरूषों की लाईनें लगाकर पराती से मिट्टी निकालने का कार्य किया गया। इसी प्रकार जिले के सभी उपखण्ड, तहसील, पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत स्तर पर अभियान को आगे बढ़ाते हुये कुओं, बावड़ी, तालाब, एनिकट आदि की साई एवं खुदाई का कार्य किया जा रहा है।

इसके साथ ही जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा जल के संरक्षण के लिये सभी सरकारी एवं गैर सरकारी भवनों की छत के पानी को संरक्षित करने के लिये रैन वाटर हार्वेस्टिंग किया जायेगा। इसके लिये भी अभियान चलाया जा रहा है। इसमें सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों के भवनों, सरकारी कार्यालयों, गैर सरकारी संस्थानों के भवनों एवं निजी आवासीय भवनों पर भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग करवाने का कार्य किया जा रहा है। इससें वर्षा के बहले जल को संरक्षित किया जा कर आमजन के उपयोग में लाने का कार्य किया जायेगा।

वर्षा जल संचयन

वर्षा जल संचयन या रेन वाटर हार्वेस्टिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें हम वर्षा के पानी को जरूरत की चीजों में उपयोग कर सकते हैं। वर्षा के पानी को एक निर्धारित किए हुए स्थान पर जमा करके हम वर्षा जल संचयन कर सकते हैं। इसको करने के लिए कई प्रकार के तरीके है। जिनकी मदद से हम रेन वाटर हार्वेस्टिंग कर सकते हैं। इन तरीकों में जल को मिट्टी तक पहुंचने (भूजल) से पहले जमा करना जरूरी होता है। इस प्रक्रिया में ना सिर्फ वर्षा जल को संचयन करना साथ ही उसे स्वच्छ बनाना भी शामिल होता है। वर्षा जल संचयन कोई आधुनिक तकनीक नहीं है यह कई वर्षों से उपयोग में लाया जा रहा है। परंतु धीरे-धीरे इसमें भी नई टेक्नोलॉजी का उपयोग बढ़ते चले जा रहा है ताकि रेन वाटर हार्वेस्टिंग आसानी और बेहतरीन तरीके से हो सके।

वर्षा जल संचयन के तरीके व उपाय

वर्षा जल संचयन करने के कई तरीके हैं। इनमें से कुछ तरीके वर्षा जल का संचयन करने में बहुत ही कारगर साबित हुए हैं। संचयन किए हुए वर्षा जल को हम व्यावसायिक और साथ ही घरेलू उपयोग में भी ला सकते हैं। इन तरीकों में कुछ तरीकों के जमा किए हुए पानी को हम घरेलू उपयोग में ला सकते हैं और कुछ तरीकों से बचाए हुए पानी का हम व्यापारी क्षेत्रा में उपयोग में ला सकते हैं।

1. सतह जल:- सतह जल वह पानी होता है जो वर्षा के बाद जमीन पर गिर कर धरती के निचले भागों में बहकर जाने लगता है। गंदी अस्वस्थ नालियों में जाने से पहले सतह जल को रोकने के तरीके को सतह जल संग्रह कहा जाता है।बड़े-बड़े ड्रेनेज पाइप के माध्यम से वर्षा जल को कुआं, नदी, जक तालाबों में संग्रहण करके रखा जाता है जो बाद में पानी की कमी को दूर करता है।

2. छत प्रणाली:- इस तरीके में छत पर गिरने वाले बारिश के पानी को संचय करके रख सकते हैं। ऐसे में ऊंचाई पर खुले टंकियों का उपयोग किया जाता है। जिनमें वर्षा के पानी को संग्रहण करके नलों के माध्यम से घरों तक पहुंचाया जाता है।यह पानी स्वच्छ होता है जो थोड़ा बहुत ब्लीचिंग पाउडर मिलाने के बाद पूर्ण तरीके से उपयोग में लाया जा सकता है।

3. बांध:- बड़े बड़े बांध के माध्यम से वर्षा के पानी को बहुत ही बड़े पैमाने में रोका जाता है जिन्हें गर्मी के महीनों में या पानी की कमी होने पर कृषि, बिजली उत्पादन और नालियों के माध्यम से घरेलू उपयोग में भी इस्तेमाल में लाया जाता है।जल संरक्षण के मामले में बांध बहुत उपयोगी साबित हुए हैं। इसलिए प्रदेश में कई बांधों का निर्माण किया गया है और साथ ही नए बांध बनाए भी जा रहे हैं।

4. भूमिगत टैंक:-यह भी एक बेहतरीन तरीका है जिसके माध्यम से हम भूमि के अंदर पानी को संरक्षित रख सकते हैं। इस प्रक्रिया में वर्षा जल को एक भूमिगत गड्ढे में भेज दिया जाता है। जिससे भूमिगत जल की मात्रा बढ़ जाती है।साधारण रूप से भूमि के ऊपर ही भाग पर बहने वाला जल सूर्य के ताप से भाप बन जाता है और हम उसे उपयोग में भी नहीं ला पाते है। परंतु इस तरीके में हम ज्यादा से ज्यादा पानी को मिट्टी के अंदर बचा कर रख पाते हैं। यह तरीका बहुत ही मददगार साबित हुआ है। क्योंकि मिट्टी के अंदर का पानी आसानी से नहीं सूखता है और लंबे समय तक पंप के माध्यम से हम उसको उपयोग में ला सकते हैं।

5. जल संग्रह जलाशय:-यह साधारण प्रक्रिया है। जिसमें बारिश के पानी को तालाबों और छोटे पानी के स्रोतों में जमा किया जाता है। इस तरीके में जमा किए हुए जल को ज्यादातर कृषि के कार्यों में लगाया जाता है क्योंकि यह जल दूषित होता है।

वर्षा जल संचयन के फायदे

घरेलू काम के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी बचा सकते हैं और इस पानी को कपड़े साफ करने के लिए खाना पकाने के लिए तथा घर साफ करने के लिए, नहाने के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है। बड़े-बड़े कल कारखाना में स्वच्छ पानी के इस्तेमाल में लाकर बर्बाद कर दिया जाता है। ऐसे में वर्षा जल को संचय करके इस्तेमाल में लाना जल को सुरक्षित करने का एक बेहतरीन उपाय है। कुछ ऐसे शहर और गांव होते हैं जहां पानी की बहुत ज्यादा कमी होती है और गर्मी के महीने में पानी की बहुत किल्लत होती है। ऐसे में उन क्षेत्रों में पानी को भी लोग बचा सकते हैं। ऐसी जगह में वर्षा के महीने में जल संचयन करना गर्मी के महीने में पानी की कमी को कुछ प्रतिशत तक कम कर सकते है।

वर्षा जल संचयन किसानों के लिए सबसे कारगर साबित हुआ है। क्योंकि वर्षा के पानी को बचाकर आज ज्यादातर किसान गर्मियों के महीने में बहुत ही आसानी से पानी की कमी को दूर कर पाए हैं। ज्यादा से ज्यादा प्राकृतिक पानी को इस्तेमाल करने से स्वच्छ पीने लायक पानी को हम ज्यादा से ज्यादा बचा सकते हैं। वर्षा पानी को शौचालय के लिए, नहाने के लिए और बर्तन धोने के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है। रेन वाटर हार्वेस्टिंग की मदद से जमा किए हुए पानी को इस्तेमाल करने से पहले अच्छे से फिल्टर किया जाना चाहिए जिससे कि इसमें मौजूद अशुद्धियां पानी से अलग हो जाए। वर्षा के पानी को ऐसे बर्तन या पात्रों में रखना चाहिए जो धूप के संपर्क पर आने पर जहरीले तत्व ना बनाते हों। वर्षा जल संचयन द्वारा जमा किए हुए पीने के पानी को अच्छे से उबालना बहुत जरूरी है ताकि इसमें मौजूद जहरीले तत्व और बैक्टीरिया का सफाया हो जाए।

India Edge News Desk

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