वन एवं पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल, सतत विकास की अवधारणा को साकार कर रहा उत्तर प्रदेश

 लखनऊ.

 उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में भूमि एवं वन सम्पदा के संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। पौध रोपण को जन अभियान बनाते हुए वर्ष 2017-18 से वर्ष 2025-26 तक प्रदेश में 242.13 करोड़ पौधों का रोपण किया गया है। जिसमें एक पेड़ मां के नाम अभियान में रिकॉर्ड पौध रोपण के साथ पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ एवं सेवा पर्वों पर रिकॉर्ड संख्या में पौध रोपण किया गया है। परिणामस्वरूप घनी आबादी वाला प्रदेश होने के बाद भी उत्तर प्रदेश में वन एवं वृक्षावरण में देश में दूसरा स्थान है। साथ ही वन्यजीव संरक्षण अभियानों के सफल संचालन से प्रदेश की जैव विविधता का भी संरक्षण किया जा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सतत एवं संपोषणीय विकास की अवधारणा को साकार करते हुए प्रदूषण निवारण और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।

“एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 37.20 करोड़ पौधे रोपित

पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देते हुए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025 में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को व्यापक स्तर पर सफल बनाया। अभियान के अंतर्गत वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित लक्ष्य 37 करोड़ के सापेक्ष अक्टूबर 2025 तक 37.20 करोड़ पौधे रोपित कर प्रदेश ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। साथ ही 01 से 07 जुलाई 2025 तक चले “पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ” अभियान के तहत 1,86,053 एवं सेवा पर्वों पर चलाए गए अभियानों में 15,49,137 पौधों का रोपण किया गया। इससे न केवल प्रदेश के हरित आवरण में वृद्धि हुई, बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने और कार्बन अवशोषण को भी बढ़ावा मिला। भारतीय वन सर्वेक्षण, देहरादून की इंडिया स्टेट फॉरेस्ट रिपोर्ट 2023 के अनुसार उत्तर प्रदेश वनावरण व वृक्षाच्छादन की दृष्टि से देश में दूसरे स्थान पर है। पर्यावरणीय सहभागिता को संस्थागत स्वरूप देते हुए वर्ष 2025 में प्रत्येक ग्राम पंचायत में ‘ग्रीन चौपाल’ का गठन किया गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जनजागरूकता को बढ़ावा देना है। साथ ही सामाजिक वानिकी के अंतर्गत वन महोत्सव 2025, सेवा पर्व और ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों पौधों का रोपण किया गया, जिससे समाज के हर वर्ग की भागीदारी के साथ प्रदेश के वृक्षावरण और वनावरण में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की गई।

वन्यजीव संरक्षण में प्रदेश ने हासिल की उल्लेखनीय उपलब्धि

वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी प्रदेश ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। गोरखपुर के कैम्पियरगंज रेंज में स्थापित जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र रेड-हेडेड गिद्ध के संरक्षण के लिए देश का पहला समर्पित केंद्र है। वहीं राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की स्टेटस ऑफ टाइगर्स-2022 रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में बाघों की संख्या वर्ष 2018 के 173 से बढ़कर वर्ष 2022 में 205 हो गई है, जो राष्ट्रीय स्तर पर बाघों की आबादी का लगभग 5.6 प्रतिशत है। साथ ही पीलीभीत टाइगर रिजर्व को बाघ संरक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए टीएक्स-2 अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही प्रदेश में गंगा डॉल्फिन, सारस पक्षी, बारासिंघा, काला हिरण, चिंकारा, भालू, लंगूर जैसे वन्यजीवों के संरक्षण के भी विशेष अभियान चलाए गए।

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में वर्ष 2025 में आगरा, झांसी और मुरादाबाद को राष्ट्रीय सम्मान

उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने कार्बन क्रेडिट फाइनेंस योजना लागू की है, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वर्ष 2025 में स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के अंतर्गत आगरा, झांसी और मुरादाबाद जैसे शहरों को शहरी हरियाली, मियावाकी वृक्षारोपण और अपशिष्ट प्रबंधन में बेहतर प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ। वहीं उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022 के अंतर्गत वर्तमान में 2815 मेगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। साथ ही कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) में 213 टन प्रतिदिन की क्षमता के साथ यूपी देश में प्रथम स्थान पर है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक वनावरण एवं वृक्षावरण को 15 प्रतिशत तक बढ़ाना है। वर्ष 2025 के आंकड़े दर्शाते हैं कि सतत एवं संपोषणीय विकास और पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी के समन्वय से उत्तर प्रदेश भूमि एवं वन सम्पदा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ग्रीन यूपी के संकल्प की सिद्धि की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

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