जगन्नाथ मंदिर का झंडा हवा के विपरीत क्यों लहराता है? खुला रहस्य

जगन्नाथ मंदिर की महिमा कौन नहीं जानता. पुरी का जगन्नाथ मंदिर अपनी भव्यता और आस्था के लिए विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन इससे जुड़े कई रहस्य और परंपराएं भी हैं, जो आपको हैरान कर देंगी. इन्हीं में से एक है इस मंदिर का झंडा जो हवा की दिशा के विपरीत लहराता है. आम तौर पर झंडा हवा के साथ उड़ता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं होता. यही बात इस मंदिर को रहस्यमयी और अद्भुत बनाती है.

आज तक कोई पता नहीं लगा पाया है कि मंदिर का झंडा हवा के विपरीत दिशा में क्यों लहराता है. स्थानीय लोग इसे भगवान जगन्नाथ की दैवीय शक्ति का संकेत मानते हैं. कहा जाता है कि मंदिर के ऊपर लहराता झंडा नकारात्मक ऊर्जाओं को खत्म करता है और पूरे वातावरण में सकारात्मकता फैलाता है. इस झंडे को हर दिन बदला जाता है, लेकिन यह काम कोई साधारण नहीं है, बल्कि भगवान के प्रति भक्ति और विश्वास का प्रतीक माना जाता है. हर शाम लगभग सूर्यास्त के समय पुराना झंडा उतारकर नया त्रिकोणीय झंडा लगाया जाता है.

सर्दियों में यह काम करीब 5 बजे और गर्मियों में 6 बजे के आसपास किया जाता है. ऐसा भी है कि अगर किसी दिन झंडा नहीं बदला गया, तो मंदिर 18 सालों तक बंद हो सकता है. इसलिए चाहे बारिश हो या तूफान, यह परंपरा एक दिन के लिए भी नहीं रुकती. झंडा बदलने का यह कार्य एक विशेष परिवार, जिसे चुनरा सेवक या चोला परिवार कहा जाता है, के हाथों से ही होता है. इस परिवार के लोग लगभग पिछले 800 सालों से यह पवित्र जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

सबसे हैरानी की बात यह है कि वे बिना किसी सुरक्षा उपकरण के 214 फुट ऊंचे मंदिर के शिखर पर चढ़ते हैं और वहां झंडा बदलते हैं. कहा जाता है कि आज तक इस परिवार के किसी भी सदस्य को इस काम के दौरान कोई चोट नहीं लगी. पुराने झंडे को नकारात्मक ऊर्जा को सोखने वाला माना जाता है, इसलिए हर दिन नया झंडा लगाकर भगवान जगन्नाथ के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है. यह झंडा केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक है. जगन्नाथ मंदिर का यह रहस्य भले ही विज्ञान से परे हो, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह भगवान की शक्ति और कृपा का जीवंत प्रमाण है.

India Edge News Desk

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