डालमियानगर औद्योगिक परिसर में फिर जगी उम्मीद, रेलवे ने 430 करोड़ की योजना को दी मंजूरी

 रोहतास

 डालमियानगर औद्योगिक परिसर में चार दशक से पसरा अंधेरा अब छंटने की उम्मीद जगी है।

रेलवे द्वारा 430.20 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत किए जाने के बाद एक बार फिर इस ऐतिहासिक औद्योगिक परिसर के गुलजार होने की संभावना बढ़ गई है।

कभी देश-विदेश में अपनी पहचान रखने वाला डालमियानगर औद्योगिक परिसर स्वतंत्रता आंदोलन से भी जुड़ा रहा है। ले‍क‍िन वर्तमान में यहां सन्‍नाटा है।

एश‍िया के बड़े औद्योग‍िक समूह में थी गिनती
एक समय एशिया के सबसे बड़े औद्योगिक परिसरों में शामिल रोहतास उद्योग समूह का यह क्षेत्र दुधिया रोशनी से जगमगाता था, लेकिन वर्ष 1984 में रोहतास उद्योग समूह में तालाबंदी के बाद यहां सन्नाटा और अंधेरा छा गया।

वर्ष 2007 से परिसमापन की प्रक्रिया में चल रहे रोहतास उद्योग समूह को रेलवे ने करीब 240 करोड़ रुपये में खरीदा था। इसके बाद स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी कि इस क्षेत्र की औद्योगिक पहचान फिर लौटेगी।

लोकसभा चुनाव 2009 से पहले तत्कालीन रेलमंत्री Lalu Prasad Yadav ने यहां रेल वैगन मरम्मत कारखाने का शिलान्यास किया था।

उस समय लोगों को लगा कि डालमियानगर के अच्छे दिन लौट आएंगे, लेकिन यूपीए-2 सरकार के दौरान यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई।

प्रधानमंत्री से मिलकर की गई मांग
वर्ष 2015 में एनडीए सरकार बनने के बाद तत्कालीन सांसद Upendra Kushwaha और शाहाबाद क्षेत्र के अन्य सांसदों ने प्रधानमंत्री से मिलकर यहां रेल कारखाना स्थापित करने की मांग उठाई।

जून 2017 में रेल मंत्रालय में हुई बैठक में राइट्स को यहां रेल वैगन मरम्मत एवं कपलर कारखाना स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। केंद्र सरकार ने इसके लिए बजटीय प्रावधान भी किया।

वर्ष 2018 में परिसर के कबाड़ की नीलामी 94 करोड़ रुपये से अधिक राशि में की गई। प्रस्तावित रेल कारखाने के लिए चिह्नित 219 एकड़ भूमि से कबाड़ हटाकर उसे समतल भी कर दिया गया।

डीएफसीसी निर्माण बना बाधा
इस परियोजना के बीच डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन (DFCC) का निर्माण बड़ी बाधा बन गया। प्रस्तावित रेल वैगन मरम्मत कारखाने के समीप से गुजर रहे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के कारण रेल लाइन ले जाना मुश्किल हो गया।

रेलवे ने वर्ष 2020 में बजटीय प्रावधान होने के बावजूद परियोजना को आगे बढ़ाने में असमर्थता जताई। इसके बाद राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने प्रयास किया।

उन्‍होंने रेलमंत्री अश्‍वि‍नी वैष्‍णव समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं से मुलाकात की। इसके बाद पहलेजा रेलवे स्टेशन के पास से फ्लाईओवर के जरिए डालमियानगर तक रेलवे ट्रैक ले जाने का प्रस्ताव रेल मंत्रालय को भेजा गया।

अब रेलवे ने वर्ष 2026-27 के रेल बजट में डालमियानगर रेल वैगन मरम्मत कारखाने के लिए 430.20 करोड़ रुपये का आवंटन किया है।

इससे इलाके के लोगों में एक बार फिर औद्योगिक विकास और रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद जाग उठी है।

 

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