रेलवे की छप्परफाड़ कमाई, कबाड़ बेचकर ₹6,800 करोड़ कमाए, रिकॉर्ड तोड़ा

नई दिल्ली
 भारतीय रेलवे ने अपनी वित्तीय सुदृढ़ता की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. वित्त वर्ष 2025-26 के समापन पर जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर ने स्क्रैप (कबाड़) की बिक्री से कुल 6,813.86 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है. यह आंकड़ा रेल मंत्रालय द्वारा निर्धारित 6,000 करोड़ रुपये के वार्षिक लक्ष्य से लगभग 13.5 प्रतिशत अधिक है। 

लगातार दूसरे वर्ष लक्ष्य से अधिक प्रदर्शन
रेलवे की यह सफलता कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि यह संसाधनों के कुशल मुद्रीकरण की दिशा में चल रहे व्यवस्थित प्रयासों का परिणाम है. पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में भी रेलवे ने 5,400 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 6,641.78 करोड़ रुपये की कमाई की थी. अधिकारियों के अनुसार, अनुपयोगी रेल पटरियों, पुराने इंजनों, कोचों और वैगनों के पारदर्शी ई-ऑक्शन के कारण राजस्व में यह निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। 

गैर-किराया राजस्व (NFR) में 168% की भारी वृद्धि
रेलवे के लिए स्क्रैप की बिक्री न केवल आय का स्रोत बनी है, बल्कि इसने गैर-किराया आय) को भी मजबूती दी है. रिपोर्ट के अनुसार, विज्ञापन, स्टेशन पुनर्विकास और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से होने वाली आय वित्त वर्ष 2021-22 के 290 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 777.76 करोड़ रुपये हो गई है. यह पांच वर्षों में लगभग 168 प्रतिशत की शानदार वृद्धि है. इस वर्ष के लिए NFR का लक्ष्य 720.85 करोड़ रुपये रखा गया था, जिसे रेलवे ने सफलतापूर्वक पार कर लिया है। 

बिना टिकट यात्रियों से वसूले 148 करोड़ रुपये

बिना टिकट यात्रा करने वालों पर सख्ती बढ़ाकर 148 करोड़ रुपये वसूल किए गए हैं. माल ढुलाई में भी जोन ने 21 मिलियन टन से ज्यादा माल पहुंचाकर नया रिकॉर्ड बनाया है। उत्तर मध्य रेलवे के रेलवे यार्ड, वर्कशॉप और ट्रैक के किनारे पड़ी पुरानी लोहे की चीजें, पुराने सामान और बेकार माल को नीलामी के जरिए बेचा गया, रेलवे ने इसे “कबाड़ से जुगाड़” का नाम दिया है. इस अभियान से सिर्फ पैसे ही नहीं आए, बल्कि रेलवे के स्टेशन और यार्ड साफ-सुथरे भी हो गए हैं। 

इसके अलावा, रेलवे ने बिना टिकट यात्रा पर बड़ी सख्ती की. विशेष टिकट चेकिंग ड्राइव चलाकर बिना टिकट यात्रा करने वालों से 148 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना वसूला गया. अब रेलवे नियम तोड़ने वालों पर नजर रखने की व्यवस्था और मजबूत कर दी गई है। 

पर्यावरण और संचालन को लाभ
स्क्रैप मुद्रीकरण की इस प्रक्रिया ने न केवल खजाने को भरा है, बल्कि परिचालन दक्षता में भी सुधार किया है. यार्डों, वर्कशॉप और डिपो में सालों से पड़े कबाड़ के हटने से बहुमूल्य जगह खाली हुई है, जिससे रेलवे परिसरों में सुरक्षा और स्वच्छता बढ़ी है. साथ ही, स्क्रैपिंग और रीसाइक्लिंग के माध्यम से रेलवे अपने पर्यावरणीय लक्ष्यों (Waste-to-Wealth) को भी पूरा कर रहा है। 

यात्रियों पर बिना बोझ डाले ढांचागत विकास
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस अतिरिक्त आय का उपयोग रेल बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए किया जाएगा. टिकट की दरों में वृद्धि किए बिना यात्रियों को बेहतर सुविधाएं, जैसे आधुनिक स्टेशन आउटलेट, बेहतर सुरक्षा प्रणालियां और डिजिटल सेवाएं प्रदान की जा रही हैं. वर्तमान में रेलवे नेटवर्क पर 22 प्रीमियम ब्रांडेड आउटलेट्स आवंटित किए जा चुके हैं, जो भविष्य में आय के नए द्वार खोलेंगे। 

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