Weather Update: 10 हजार KM लंबा बादलों का कारवां बंगाल की खाड़ी की ओर, जल्द झमाझम बारिश के आसार

नई दिल्ली

भारत के मौसम में इन दिनों काफी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. मॉनसून की बारिश कई इलाकों में कमजोर पड़ गई थी, लेकिन अब एक बड़ी मौसमी घटना उम्मीद जगाने लगी है. भारत के पूर्व में बंगाल की खाड़ी से लेकर मध्य प्रशांत महासागर तक 7000 से 10000 किलोमीटर लंबा इंटरट्रॉपिकल कन्वरजेंस जोन (ITCZ) बन गया है। 

यह जोन कई ट्रॉपिकल सिस्टम को अपने अंदर समेटे हुए है, जो तेजी से एक्टिव हो रहे हैं. अगर यह जोन भारत की ओर नजदीक आया तो जुलाई के आखिरी सप्ताह में बारिश की वापसी हो सकती है. ITCZ क्या है? यह पृथ्वी के भूमध्य रेखा के आसपास हवा के मिलने का क्षेत्र है, जहां ट्रेड विंड्स उत्तर और दक्षिण से आकर टकराती हैं। 

इस क्षेत्र में गर्म और नम हवा ऊपर उठती है, जिससे बादल बनते हैं और भारी बारिश होती है. सामान्यतः ITCZ मॉनसून के मौसम में भारत के ऊपर आ जाता है, लेकिन इस बार यह काफी पूर्व में बना है. यह जोन बंगाल की खाड़ी से शुरू होकर मध्य प्रशांत तक फैला है. इसमें कई ट्रॉपिकल सिस्टम एम्बेडेड हैं, जो उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहे हैं, यानी भारत की तरफ. अगर इनमें से एक भी सिस्टम मजबूती से आया तो फिर शानदार बारिश होगी। 

ITCZ के बनने का कारण और उसकी विशेषताएं
वैश्विक तापमान में बदलाव, समुद्री सतह के तापमान में वृद्धि और अन्य क्लाइमेटिक फैक्टर्स ने इस बार ITCZ को पूर्व की ओर खींच लिया है. प्रशांत महासागर में ला-नीना जैसी स्थिति या अन्य पैटर्न भी इसके पीछे हो सकते हैं. यह जोन सामान्य से कहीं ज्यादा लंबा है, जो 7000 से 10000 किलोमीटर तक फैला हुआ है। 

इसमें कई कम दबाव वाले क्षेत्र और उष्णकटिबंधीय तरंगें (Tropical Waves) सक्रिय हैं. ये सिस्टम धीरे-धीरे पश्चिम की ओर, यानी बंगाल की खाड़ी की तरफ बढ़ रहे हैं। 

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इनमें से कुछ सिस्टम बंगाल की खाड़ी पहुंचे तो वे मॉनसून ट्रफ लाइन को मजबूत कर सकते हैं. इससे भारत के पूर्वी, मध्य और उत्तरी हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है. हालांकि, अभी यह पूरी तरह तय नहीं है कि ये सिस्टम कितनी ताकत के साथ आएंगे और कितना पानी देंगे। 

20-30 जुलाई में बारिश की संभावना
मौसम विभाग और अंतरराष्ट्रीय मॉडल्स के अनुसार, 20 से 30 जुलाई के बीच इन ट्रॉपिकल सिस्टम्स का असर भारतीय उपमहाद्वीप पर पड़ सकता है. अगर ITCZ नजदीक आया तो कमजोर मॉनसून फिर एक्टिव हो जाएगा. कई राज्यों में जहां बारिश की कमी चल रही है, वहां राहत मिल सकती है. खासकर बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे क्षेत्रों में बारिश लौटने की उम्मीद है। लेकिन यह भी संभव है कि सिस्टम बहुत ज्यादा ताकतवर बनकर चक्रवात का रूप ले लें. ऐसी स्थिति में भारी बारिश के साथ बाढ़ और तूफान का खतरा भी बढ़ सकता है. इसलिए मौसम विभाग सतर्क रहने की सलाह दे रहा है. किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए। 

ITCZ और भारतीय मॉनसून का रिलेशन
भारतीय मॉनसून मुख्य रूप से ITCZ की स्थिति पर निर्भर करता है. जब ITCZ उत्तर की ओर शिफ्ट होता है, तो दक्षिण-पश्चिम मॉनसून हवाएं भारत की ओर खिंचती हैं. इस बार ITCZ के पूर्व में रहने से मॉनसून की प्रगति पर असर पड़ा है. अब अगर यह जोन पश्चिम की ओर बढ़ा तो मॉनसून की ट्रफ भी सक्रिय होगी। 

पिछले कुछ सालों में जलवायु परिवर्तन के कारण ITCZ का व्यवहार अनियमित होता जा रहा है. कभी यह ज्यादा उत्तर चला जाता है, तो कभी दक्षिण. इससे सूखा और बाढ़ दोनों की घटनाएं बढ़ रही हैं. वैज्ञानिक लगातार इस पर नजर रखे हुए हैं क्योंकि ITCZ की गति न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के मौसम को प्रभावित करती है। 

अगर बारिश लौटी तो खेतीबाड़ी के लिए अच्छी खबर है. जिन इलाकों में रोपाई प्रभावित हुई है, वहां किसान राहत की सांस लेंगे. लेकिन अचानक भारी बारिश से निचले इलाकों में जलभराव और फसलों को नुकसान भी हो सकता है. शहरों में ड्रेनेज सिस्टम की जांच करनी होगी। 

मछुआरों को भी सतर्क रहना चाहिए क्योंकि बंगाल की खाड़ी में ट्रॉपिकल सिस्टम सक्रिय होने से समुद्र में ऊंची लहरें उठ सकती हैं. सरकार और प्रशासन को राहत सामग्री पहले से तैयार रखनी चाहिए। 

आने वाले समय में क्या होगा?
यह घटना हमें याद दिलाती है कि मौसम की भविष्यवाणी कितनी मुश्किल है. जलवायु परिवर्तन के कारण पुराने पैटर्न बदल रहे हैं. भारत जैसे कृषि प्रधान देश को बेहतर मौसम मॉनिटरिंग सिस्टम और जलवायु अनुकूल खेती की जरूरत है. ITCZ जैसे बड़े सिस्टम की निगरानी के लिए सैटेलाइट, सुपर कंप्यूटर और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बहुत जरूरी है. अगर हम समय रहते तैयारी करें तो बारिश की वापसी फायदे का सौदा साबित हो सकती है। 

7000-10000 किलोमीटर लंबे ITCZ का बनना एक महत्वपूर्ण मौसमी घटना है. इसमें छिपे ट्रॉपिकल सिस्टम अगर बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़े तो 20-30 जुलाई के आसपास भारत में बारिश की वापसी संभव है. हालांकि, इसकी तीव्रता और असर अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. उम्मीद है कि यह ITCZ भारत के लिए अच्छी बारिश लाएगा और मॉनसून की कमी पूरी करेगा। 

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