जाने कौन हैं मीनाक्षी नटराजन? राहुल गांधी की करीबी नेता को कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह की सीट से बनाया राज्यसभा उम्मीदवार

भोपाल
 मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह की खाली हो रही सीट पर पार्टी ने लंबे समय बाद किसी महिला चेहरे पर दांव खेला है। राहुल गांधी की बेहद करीबी और तेलंगाना की एआईसीसी प्रभारी मीनाक्षी नटराजन आखिर कौन हैं और क्रॉस वोटिंग के डर के बीच कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें ही क्यों चुना?

आगामी राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर भाजपा द्वारा मध्य प्रदेश से दो प्रत्याशी घोषित करने के चंद घंटे बाद कांग्रेस पार्टी ने भी देश के 5 राज्यों में खाली हो रही 7 सीटों के लिए प्रत्याशी घोषित कर दिए। इसमें एकमात्र महिला प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नाम शामिल है। उन्हें मध्य प्रदेश से खाली हो रही कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सीट से प्रत्याशी बनाया गया है। इसके बाद उन तमाम अटकलों पर विराम लग गया जिसमें अलग—अलग नेताओं के दावेदारी को लेकर दावे किए जा रहे थे।

    उज्जैन के नागदा में जन्म, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा।
    जैव रसायन में स्नातकोत्तर और कानून में स्नातक की डिग्री।
    एनएसयूआई की राष्ट्रीय अध्यक्ष और युवा कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी हैं।
    2009 में मंदसौर लोकसभा सीट से सांसद चुनी गई थीं।
    वर्तमान में तेलंगाना की एआईसीसी प्रभारी और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता हैं।

दिग्गजों को पछाड़कर महिला चेहरे पर दांव

मध्य प्रदेश से राज्यसभा टिकट के लिए कांग्रेस के भीतर दिग्गजों की लंबी फेहरिस्त थी। दावेदारों में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, अरुण यादव, सज्जन सिंह वर्मा और शोभा ओझा सहित करीब दर्जनभर बड़े नाम शुमार थे। लेकिन पार्टी आलाकमान ने गुटीय राजनीति से दूर रहते हुए एक कद्दावर और साफ-सुथरी छवि वाली महिला नेत्री पर भरोसा जताया है।

राहुल गांधी की करीबी और NSUI की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष
मीनाक्षी नटराजन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की एक बेहद सीनियर और जमीनी नेता मानी जाती हैं। उन्हें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की 'कोर टीम' का हिस्सा और उनका बेहद करीबी माना जाता है। उनकी राजनीतिक यात्रा बेहद शानदार रही है।

मीनाक्षी नटराजन का राजनीतिक सफर
उन्होंने छात्र राजनीति से शुरुआत एनएसयूआई से की। वे 1999 से 2002 तक NSUI की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहीं।
इसके बाद 2002 से 2005 तक उन्होंने मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली। वे साल 2009 के लोकसभा चुनाव में मंदसौर निर्वाचन क्षेत्र से 15वीं लोकसभा की सांसद चुनी गई थीं। हालांकि, 2014 और 2019 के चुनावों में उन्हें भाजपा के सुधीर गुप्ता से हार का सामना करना पड़ा। वर्तमान में वह तेलंगाना की एआईसीसी प्रभारी के रूप में कार्यरत हैं और 'राजीव गांधी पंचायती राज संगठन' की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।

क्रॉस वोटिंग का डर, दिल्ली में नेताओं की 'घेराबंदी'
मीनाक्षी नटराजन के नाम के एलान के साथ ही कांग्रेस के सामने अपनी सीट सुरक्षित रखने की सबसे बड़ी चुनौती है। बिहार, हरियाणा और ओडिशा जैसे राज्यों में क्रॉस वोटिंग का दंश झेल चुकी कांग्रेस इस बार मध्य प्रदेश में कोई रिस्क नहीं लेना चाहती।

राज्यसभा उम्मीदवार, जानिए सागर से दिल्ली तक का सफर
सूत्रों के मुताबिक, विधायकों में सेंधमारी रोकने के लिए कांग्रेस हाईकमान ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। पूर्व पीसीसी चीफ अरुण यादव को बीते दिनों दिल्ली तलब किया गया था, जबकि इससे पहले कमलनाथ और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी दिल्ली जाकर शीर्ष नेतृत्व को रिपोर्ट सौंप चुके हैं। हालांकि भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है, कि वह खाली हुई तीसरी सीट पर प्रत्याशी नहीं उतारेगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *