लगातार बारिश के कारण स्कूल बंद, बीजापुर और सुकमा सबसे ज्यादा प्रभावित

इंडिया एज न्यूज नेटवर्क

सुकमा/बीजापुर : प्रशासन छत्तीसगढ़ के दक्षिणी हिस्सों में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्कूलों को बंद करने के लिए मजबूर है, जहां पिछले एक सप्ताह से हो रही लगातार बारिश ने कहर बरपा रखा है। अशांत बीजापुर और सुकमा जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।

सुकमा जिले के कोंटा में सबरी नदी का बहता पानी घरों में घुस गया है। फंडीगुड़ा के पास भारी जलजमाव के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग के साथ कोंटा से पांच किलोमीटर की दूरी एक द्वीप में बदल गई है।

वहीं, बीजापुर जिले की भोपनपट्टनम तहसील में गोदावरी-इंद्रावती नदी के किनारे बसे करीब एक दर्जन गांव बाढ़ के पानी से भर गए हैं। लगातार हो रही बारिश ने तारलागुडा बस्ती को जलमग्न स्थिति में छोड़ दिया है। पोटा केबिन के प्राइमरी, मिडिल और हाई स्कूल के लड़के-लड़कियों ने थाने में शरण ली है। तारलागुडा, चंदूर, कांडला, रामपेटा और कोट्टूर आदि गांवों में स्थित पोटा केबिनों, आश्रम-छात्रावासों में बच्चों को निकाला गया है। बाढ़ से प्रभावित कांडला के अधिकांश ग्रामीणों के गांव छोड़कर पास की पहाड़ी पर चले जाने की सूचना है। मौजूदा हालात को देखते हुए दोनों जिलों के करीब 400 स्कूलों को बंद करना पड़ा। इस बीच विधायक विक्रम मंडावी ने कलेक्टर राजेंद्र कटारा के साथ प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। दोनों भारी बारिश से प्रभावित इलाकों में बाइक से पहुंचे। इस स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग को यह तय करने की छूट दी गई है कि स्कूल चलाए जाएं या नहीं। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के साथ बीजापुर के साथ सुकमा का सड़क संपर्क लगातार चौथे दिन भी कट गया। प्रशासन की टीमें बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं। फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का काम भी जारी है।

India Edge News Desk

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